Saturday, March 7, 2026
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उत्तराखंड में 34 बूथों पर आज कोविड टीकाकरण

देहरादून। प्रदेश में कोविड टीकाकरण अभियान के तहत सोमवार को 34 बूथों पर हेल्थ वर्करों को वैक्सीन की खुराक दी जा रही है। प्रत्येक बूथ पर 100 हेल्थ वर्करों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। पहले दिन गत शनिवार को 2276 हेल्थ वर्करों को सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया की ओर से तैयार की वैक्सीन कोविशील्ड लगाई गई। 

केंद्र सरकार की ओर जारी दिशानिर्देशों के अनुसार प्रदेश में सप्ताह में चार दिन टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत सोमवार को हेल्थ वर्करों को टीका लगाया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी पूरी कर दी है। वहीं सोमवार को सभी केंद्रों में सुबह दस बजे से टीकाकरण की शुरुआत हो गई है। सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक टीकाकरण किया जाएगा। 

राज्य कोविड कंट्रोल रूम के चीफ आपरेटिंग आफिसर डॉ. अभिषेक त्रिपाठी का कहना है कि 34 बूथों पर हेल्थ वर्करों को वैक्सीन लगाई जाएगी। टीका उन्हें हेल्थ वर्करों को लगेगा। जिनका डाटा कोविन पोर्टल पर अपलोड है। टीका लगवाने के लिए हेल्थ वर्करों के मोबाइल पर मैसेज मिलेगा। उन्हीं को वैक्सीन लगाई जाएगी। प्रत्येक बूथ पर एक दिन में 100 हेल्थ वर्करों को ही टीका लगाया जाएगा।

दून अस्पताल के एमएस डॉ. टम्टा की तबीयत बिगड़ी
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) डॉ. केके टम्टा की रविवार सुबह तबीयत खराब हो गई। उन्हें शनिवार को कोरोना की वैक्सीन लगी थी। हालांकि, उन्हें कोरोना वैक्सीन के किसी तरह के साइड इफेक्ट से चिकित्सक इनकार कर रहे हैं, फिर भी कॉलेज प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) नई दिल्ली को भेज दी है।

डॉ. केके टम्टा की तबीयत खराब होने पर उन्हें रविवार सुबह दून अस्पताल इमरजेंसी में उपचार के लिए ले जाया गया। प्राथमिक जांच के बाद उन्हें दून अस्पताल के वीआईपी वार्ड में भर्ती कराना पड़ा। डाक्टरों के मुताबिक उनकी तबीयत सामान्य है और घबराने जैसी कोई बात नहीं है।

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना और दून अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. एनएस खत्री ने बताया कि डाक्टरों की टीम उनकी देखरेख में लगी है। उनकी सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड समेत खून की जांचें कराई गई हैं। सभी रिपोर्ट सामान्य हैं। शरीर में नमक की मात्रा कम होने से दिक्कत हुई है। उन्हें एईएफआई (आफ्टर इफेक्ट फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन) नहीं हैं।

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