Sunday, March 8, 2026
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किसान विरोधी बिल के विरोध में ने जाम लगा किया प्रदर्शन

देहरादून। हाल ही में लोकसभा और राज्यसभा में पास हुए केंद्र सरकार के कृषि विधेयकों के विरोध में भारतीय किसान यूनियन तोमर गुट के सदस्यों ने देहरादून के आइएसबीटी चैक पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान देहरादून से सहारनपुर व सहारनपुर से देहरादून आने वाली सड़क जाम रही। किसानों ने दर्जनों ट्रैक्टरों व गाड़ियों को सड़क पर लगाकर केंद्र सरकार के विरोध में जमकर नारेबाजी की।

यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष सोमदत्त शर्मा ने कहा कि बिना किसानों से रायसुमारी किए केंद्र सरकार ने कृषि विधेयकों को दोनों सदनों में पास कराया, वह निंदनीय है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मनमानी पर उतारू है। अन्नदाता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। नए कृषि विधेयकों से किसान कुछ ही दिनों में भूमिहीन हो जाएंगे। ये विधेयक पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाए गए हैं।


उन्होंने कहा कि जब तक सरकार अपने अध्यादेश में संशोधन या इसे वापस नहीं लेती है, किसान सड़कों पर उतरकर विरोध करते रहेंगे। मौके पर पहुची सिटी मैजिस्ट्रेट कुसुम चैहान का माध्यम से किसानों ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है। विरोध प्रदर्शन जारी है।


विकासनगर में किसानों के बंद में शामिल होंगे कई संगठन

लोकसभा व राज्यसभा में पारित कृषि विधेयकों के विरोध में किसान संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया है, जिसमें क्षेत्र के कई संगठन शामिल होंगे। इसके तहत सहसपुर स्थित गुरु रामराय इंटर कॉलेज से रैली निकलेगी। उत्तराखंड किसान सभा, उत्तराखंड सर्वोदय मंडल, उत्तराखंड भूतपूर्व सैनिक संगठन व अर्धसैनिक संगठन, देहरादून-डोईवालागन्ना समिति, वन जन श्रमजीवी यूनियन, उत्तराखंड भूमिहीन समिति ने शुक्रवार को प्रस्तावित भारत बंद में शामिल होने का एलान किया है।

सहसपुर के पूर्व ग्राम प्रधान व कम्युनिस्ट नेता सुंदर थापा ने बताया कि सरकार ने कृषि बिल पारित करके किसानों के साथ अन्याय किया है। खेती को पूंजीपतियों के हाथ बंधक बनाने के प्रयास के तहत पास किए गए इन बिलों का किसान व मजदूर हर स्तर पर विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को बिल पास करने के पहले किसानों की राय लेनी चाहिए थी, जो कि उन्होंने नहीं ली।

इसके अलावा कृषि सुधारों के नाम पर किए जाने वाले फसलों का मूल्य, गन्ना भुगतान को सरल बनाने, खाद-बीज आदि की कीमतों में कमी करने, फसलों के नुकसान को दिए जाने वाले मुआवजे की रकम बढ़ाने जैसे सुधार करने के बजाए सरकार ने खेती में पूंजीपतियों के अनावश्यक दखल को बढ़ाने का काम किया है। कहा कि देश का किसान सरकार के इस फैसले का हर स्तर पर विरोध करेगा।

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