Saturday, March 7, 2026
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जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर दूसरे दलों ने उठाए सवाल, सीएम बोले- बाहर से आने वालों की जानकारी लेना गलत नहीं

उत्तराखंड में जनसांख्यिकीय बदलाव (डेमोग्राफिक चेंज) पर राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदम का विपक्षी दलों के लोग भी स्वागत कर रहे हैं, लेकिन ऐन चुनाव से पहले इस मुद्दे को उठाने पर सरकार की मंशा पर सवाल भी उठा रहे हैं। विपक्षी पार्टियों के नेताओं का कहना है कि यदि सरकार की मंशा साफ होती तो बहुत पहले ही मुद्दे पर किसी निर्णय पर पहुंच जाना चाहिए था।

वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में जो लोग भी बाहर से आकर बसेंगे, सरकार उनकी जानकारी जुटाएगी। बाहर से आने वाले लोगों की जानकारी लेना गलत बात नहीं है। देहरादून में बुधवार को मीडिया कर्मियों से बातचीत में जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर शासन के हाल ही में जारी आदेश को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जनसंख्या घनत्व एकदम से बढ़ा है।

राज्य में बहुत सारी आपराधिक गतिविधियां संचालित हुई हैं। उन्होंने कहा कि कई बार राज्य में बहुत से लोग यहां आकर रहते हैं, लेकिन उनका कुछ अता पता नहीं होता है। सरकार ने यह तय किया है कि उत्तराखंड में जो लोग भी यहां आकर बसेंगे, उनके बारे में इस प्रकार की ड्राइव चलाई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम किसी को टारगेट करके नहीं कर रहे हैं। सरकार की यह कवायद उत्तराखंड के जनमानस के हित के लिए है। यह राज्य के लोगों की सुरक्षा के लिए है। सरकार की कोशिश है कि अपराधों पर अंकुश लगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई बार प्रदेश से बाहर से आने वाले लोगों के बारे में जानकारी नहीं होती है। उनकी जानकारी रखना कोई खराब बात नहीं हैं। मेरा मानना है कि प्रशासन के पास ऐसे लोगों की जानकारी होनी चाहिए।

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर बोले, पर पांच साल बाद क्यों आई याद

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का कहना है कि यदि बाहर के लोग आकर उत्तराखंड में बस रहे हैं, चाहे वह किसी भी धर्म से हों और इससे जनसांख्यिकीय बदलाव हो रहा है, तो इसकी रेकी करने में कोई बुराई नहीं है। इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।

कहा कि उन्होंने कांग्रेस की सरकार रहते तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के सम्मुख इस मसले का उठाया था। तब सरकार इस दिशा में आगे बढ़ने की सोच रही थी, लेकिन उससे पहले ही सरकार चली गई। उन्होंने कहा कि मध्य हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड एक अकेला ऐसा राज्य है, जिसने अपनी जमीनों को बचाने के लिए कोई सशक्त कानून नहीं बनाया है।

अब जिस भू कानून में बदलाव की बात हो रही है, उसमें भी केवल नौ प्रतिशत भूमि को रखा जा रहा है, जबकि यह शत प्रतिशत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले की रेकी होनी चाहिए, लेकिन भाजपा सरकार को तब इसकी याद आ रही है, जब वह पांच साल पूरे करने जा रही है। इसलिए उसकी मंशा पर शंका पैदा होती है।

मूल लोग जाएंगे तो कोई तो खाली स्थान भरेगा ही
राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व अध्यक्ष व आप नेता रविंद्र जुगरान का कहना है कि जब राज्य के मूल निवासी पलायन करेंगे तो कोई न कोई तो बाहर से आकर उस जगह को भरेगा ही। उत्तराखंड में यही हो रहा है। यहां के लोग बाहर जा रहे हैं और बाहर के लोग यहां आकर बस रहे रहे हैं। उनके अनुसार जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए सीधे तौर पर यहां काबिज सरकारें ही जिम्मेदार हैं।

उन्होंने कहा कि सरकारें देर से जाग रही हैं, पता नहीं जाग भी रही हैं या जागने का नाटक कर रही हैं। हम 20 साल से इस मुद्दे को उठा रहे हैं। इसके गंभीर दुष्परिणाम उत्तराखंड भुगत रहा है। उत्तराखंड एक सीमांत प्रदेश है। यदि यहां डेमोग्राफिक परिवर्तन हो रहा है तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरे की घंटी है। यहां की सरकारों ने कभी इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया, यहां कौन आकर बस रहा है। उसका उद्देश्य क्या है। बाहरी लोगों ने यहां राशन कार्ड, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र और मूल निवास प्रमाण पत्र तक बनवा लिए हैं। इससे पूरा ताना-बाना छिन्नभिन्न हो रहा है।

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