Sunday, March 8, 2026
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राजकीय चिकित्सालय के गेट के बाहर प्रसव प्रकरण पर चिकित्सक निलंबित, संयुक्त सचिव स्वास्थ्य ने जारी किए आदेश

देहरादून। शासन ने राजकीय चिकित्सालय, हल्द्वानी के गेट पर हुए प्रसव के मामले में आरोपित चिकित्सक डा दिशा बिष्ट को निलंबित कर दिया है। उन्हें निलंबन की अवधि में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, नैनीताल कार्यालय से संबद्व किया गया है। संयुक्त सचिव स्वास्थ्य मुकेश कुमार राय द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं।

हल्द्वानी में गत 10 जुलाई को एक महिला का अस्पताल गेट पर प्रसव का प्रकरण सामने आया था। मामला जब सुर्खियां बना तो मुख्यमंत्री प्रष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डा धन सिंह रावत ने मामले की जांच कर आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए थे। इस पर स्वास्थ्य महानिदेशक ने एक जांच समिति का गठन किया। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में राजकीय जिला अस्पताल, हल्द्वानी में तैनात नर्सिंग अधिकारी और चिकित्सक को इसका दोषी माना था।

स्वास्थ्य महानिदेशक ने जांच रिपोर्ट आने के तुरंत बाद नर्सिंग अधिकारी दीप्ति रानी को निलंबित कर दिया था, जबकि डा दिशा बिष्ट के निलंबन की संस्तुति शासन से की गई। सीएमएस खटीमा से भी मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्वास्थ्य महानिदेशक की संस्तुति के क्रम में बुधवार को शासन ने मामले में दोषी पाई गई चिकित्सक डा दिशा बिष्ट को भी निलंबित कर दिया। शासन द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली के तहत डा दिशा बिष्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। निलंबन अवधि में डा दिशा बिष्ट को जीवन निर्वाह भत्ते की धनराशि देय होगा।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए बदलेंगे जनसंख्या के मानक
प्रदेश में अब जल्द ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) खोलने के मानक बदले जाएंगे। इसके लिए प्रदेश सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर पीएचसी के मानक बदलने का अनुरोध किया है। केंद्र के मानकों के अनुसार अभी 20 हजार की जनसंख्या पर एक पीएचसी खोलने की व्यवस्था है। प्रदेश सरकार ने प्रदेश की विषम भौगोलिक स्थिति के दृष्टिगत उत्तराखंड में तीन हजार की जनसंख्या पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।

प्रदेश में आमजन को प्रभावी एवं सुगम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए चार स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन्हें आइपीएचएस के मानकों के अनुसार बनाया जा रहा है। अभी प्रदेश में 13 जिला चिकित्सालय, 21 उप जिला चिकित्सालय, 79 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 577 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की भूमिका काफी अहम हो जाती है। कोरोना काल के दौरान भी इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की भूमिका काफी अहम रही थी। इस दौरान सरकार ने भी इन्हें मजबूत करने का काम किया। यहां आक्सीजन सिलिंडर और नए उपकरण पहुंचाए गए।

हालांकि, पर्वतीय क्षेत्रों की विषय भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मरीजों को इलाज के लिए मैदानी जिलों की ओर ही रूख करना पड़ा। दरअसल, प्रदेश में अभी 20 हजार की जनसंख्या पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने का प्रविधान है। मैदानी जिलों में चूंकि जनसंख्या पर्वतीय इलाकों से अधिक है, इस कारण यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की दूरी बहुत अधिक नहीं है। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थिति इससे बिल्कुल अलट हैं।

यहां कई स्थानों पर 20 हजार की जनसंख्या 20 से 25 किमी के दायरे में आती है। ऐसे में आमजन को इनका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता है। इसे देखते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के मानक को बदलने की लगातार मांग चल रही है। स्वास्थ्य मंत्री डा धन सिंह रावत ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने के मानकों को बदलने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा गया है। अनुरोध किया गया है कि तीन हजार की जनसंख्या पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने की अनुमति प्रदान की जाए।

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