Sunday, March 8, 2026
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तीर्थ नगरी ऋषिकेश का चुनावी समीकरण,भाजपा में दावेदारों की फ़ौज।

ऋषिकेश विधानसभा सीट पर 15 सालों से भाजपा का दबदबा है. इस सीट से प्रेमचंद अग्रवाल लगातार तीन बार से विधायक हैं.

ऋषिकेश भारत के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में एक है. ऋषिकेश को केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री का प्रवेशद्वार माना जाता है. हर साल यहां के आश्रमों में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री ध्यान लगाने और मन की शान्ति के लिए आते हैं. ऋषिकेश का धार्मिक महत्त्व होने के साथ ही राजनीतिक महत्व भी है. ऋषिकेश विधानसभा सीट देहरादून जिले में पड़ती है. 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रेमचंद अग्रवाल विधायक चुने गए थे.

2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रेमचंद अग्रवाल लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए थे. उन्होंने कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार राजपाल सिंह को हराया था. इस चुनाव में भाजपा के प्रेमचंद अग्रवाल को 45,082 वोट मिला था, जबकि कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार राजपाल सिंह को 30,281 वोट मिला था. तीसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार संदीप गुप्ता थे, जिन्हें 17,149 वोट मिला था. बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार लल्लन भारद्वाज को 2,866 वोट मिला था.

 

इस बार भाजपा में दावेदारों की फ़ौज

ऋषिकेश विधानसभा सीट से बीजेपी के दावेदारों में जो सबसे पहले नाम आता है, वो हैं वर्तमान विधायक और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल से जो पिछले तीन बार से ऋषिकेश के विधायक चुने जा रहे हैं. हर बार विधानसभा चुनाव में इनकी जीत का अंतर बढ़ता ही गया है. प्रेमचंद अग्रवाल पहली बार विधानसभा ऋषिकेश से विधायक का चुनाव लड़े. जिसके बाद वह एक के बाद एक लगातार तीन बार ऋषिकेश के विधायक बने.

तीसरी बार विधायक बनने के बाद उनको विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया. इतना ही नहीं प्रेमचंद अग्रवाल छात्र राजनीति के समय से ही भाजपा से जुड़े हुए हैं, विधायक बनने से पहले भी वे कई अहम पदों पर रह चुके हैं. संघ में भी इनके परिवार की अच्छी पकड़ बताई जाती है. लगातार तीन बार विधायक जीतना के साथ-साथ कई सारे समीकरण प्रेमचंद अग्रवाल को चौथी बार ऋषिकेश से विधायक प्रत्याशी बनाने की ओर इशारा करते हैं. ऐसे में प्रेमचंद अग्रवाल इस बार भी टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी से विधायक के टिकट की दावेदारी करने वालों में दूसरा नाम आता है ऋषिकेश की महापौर अनीता ममगाईं का. जो वर्तमान में ऋषिकेश नगर निगम की महापौर हैं. पहली बार ही अनीता को किसी बड़े चुनाव के लिए भाजपा ने टिकट दिया. जिस पर वह खरी उतरी और ऋषिकेश की महापौर चुनी गई. उनकी जीत का अंतर भी काफी बड़ा रहा है.

अनीता ममगाई को भाजपा संगठन मंडल अध्यक्ष से लेकर कई अहम पदों की जिम्मेदारी दे चुकी है. सभी कसौटियों पर खरा उतरने के बाद उनको ऋषिकेश के मेयर का टिकट मिला और उन्होंने जीत दर्ज की. वहीं, चुनाव जीतने के बाद अनीता लगातार क्षेत्र में सक्रियता से काम कर रही हैं. उनके कार्यों में सबसे बड़ी उपलब्धि ऋषिकेश ट्रंचिंग ग्राउंड को शिफ्ट करने का हासिल हुई है.

ऋषिकेश विधानसभा सीट पर अपनी किस्मत को आजमाने के लिए बेताब दिख रहे भगतराम कोठारी भी इस दौड़ में शामिल हैं. भगतराम कोठारी ने अपनी दावेदारी भी पार्टी के सामने ठोक दी है. भगतराम कोठारी वर्तमान भाजपा की सरकार में मुख्यमंत्री रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उनको राज्यमंत्री का दर्जा दिया था. राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद भगतराम कोठारी ने सरकार के द्वारा मिलने वाली सभी सुख-सुविधाओं को त्याग दिया था और किसी भी तरह का सरकारी लाभ वह नहीं ले रहे थे. इस खबर की चर्चा पूरे उत्तराखंड में थी और भगत राम की इस बात को लेकर काफी वाहवाही भी हुई.

एक नाम और है जो काफी तेजी से चर्चाओं में आया है. वह है युवा नेता संजीव चौहान का. संजीव चौहान वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य हैं. उत्तराखण्ड में जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में सबसे अधिक मतों से विजयी होने का रिकॉर्ड भी संजीव के नाम है. संजीव वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य होने के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यालय प्रभारी भी हैं. इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के युवा वोटरों में संजीव की अच्छी पकड़ बताई जाती है. स्पोर्ट्स के क्षेत्र में उनकी भागीदारी युवाओं को अपनी और आकर्षित करती है.

विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा से एक ओर नाम है संदीप गुप्ता का. जो पिछले कई वर्षों से ऋषिकेश में राजनीति करते आ रहे हैं. उनकी पकड़ ऋषिकेश के व्यापारियों में अच्छी बताई जाती है. संदीप गुप्ता पूर्व में राज्यमत्री रह चुके हैं. इसके साथ ही उन्हें पार्टी के कई उच्च पदों की जिम्मेदारी भी मिल चुकी है. संदीप गुप्ता को भारतीय जनता पार्टी की ओर से 2002 में ऋषिकेश से विधायक प्रत्याशी बनाया गया था लेकिन उनको उस समय हार का सामना करना पड़ा था. जिसके बाद संदीप गुप्ता ने कई बार टिकट की दावेदारी की लेकिन उनको टिकट नहीं मिल पाया, अंततः उन्होंने पार्टी से बगावत करते हुए 2017 में निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे लेकिन उनको हार का सामना करना पड़ा.

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