देहरादून। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम खराब होने के बाद हेमकुंड साहिब में लगातार बर्फबारी हो रही है, जिससे धाम में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। वहीं, मौसम विज्ञान केंद्र ने 26 से 28 सितंबर तक प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 26 और 27 सितंबर को कई पर्वतीय और मैदानी जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सीएस तोमर के अनुसार, मौजूदा मौसमी परिस्थितियों के चलते 26 से 27 सितंबर के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। दक्षिण ओडिशा और उससे सटे दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर बना अवदाब उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसका असर उत्तराखंड के मौसम पर भी पड़ रहा है।
26 सितंबर को इन जिलों में रेड अलर्ट
26 सितंबर को बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी और कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा का रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, देहरादून, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है।
27 सितंबर को चार जिलों में रेड अलर्ट
27 सितंबर को देहरादून, टिहरी, हरिद्वार और पौड़ी में भारी से बहुत भारी तथा कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। नैनीताल, उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का ऑरेंज अलर्ट है।
28 सितंबर को उत्तरकाशी, हरिद्वार और देहरादून में कहीं-कहीं भारी बारिश और गरज के साथ तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है।
भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा
मौसम विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन और चट्टानें गिरने की आशंका जताई है। इसके चलते सड़क और राजमार्ग बाधित हो सकते हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने, नालों में अचानक बाढ़ आने और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। कच्चे मकानों, पुलों और निर्माणाधीन भवनों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
भारी बारिश के कारण बिजली और पानी जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। चारधाम यात्रा, पर्वतारोहण अभियान और हेली सेवाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से सतर्क रहने और मौसम की स्थिति को देखते हुए ही यात्रा करने की अपील की है।
प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों को नदी-नालों और उफनती धाराओं से दूर रहने, भारी बारिश के दौरान घरों के अंदर रहने तथा सक्रिय भूस्खलन वाले क्षेत्रों को पार नहीं करने की सलाह दी है।

