धारचूला। चीन सीमा से सटी व्यास घाटी में आदि कैलास मार्ग पर समुद्र तल से 12,300 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित अंतिम गांव कुटी में 12 वर्षों बाद सात दिवसीय कुंभ पूजा का आयोजन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। धार्मिक अनुष्ठान में रं समुदाय की परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर देश और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की गई।
पूजा में पुजारी (लमाओ) चेत सिंह, हरीश समेत अन्य लोगों ने रं परंपरा के अनुसार हया गुलच, हया नमच्यल सहित विभिन्न देवी-देवताओं की विधिवत पूजा की। सात दिनों तक चले धार्मिक आयोजन में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पारंपरिक वेशभूषा में निकली भव्य शोभायात्रा
कुंभ पूजा के समापन अवसर पर ग्राम प्रधान नगेंद्र सिंह कुटियाल के नेतृत्व में पारंपरिक वेशभूषा और स्थानीय वाद्य यंत्रों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान नेपाल, दारमा और चौदास घाटी समेत देश के विभिन्न हिस्सों से अपने मायके पहुंचीं 200 से अधिक बेटियों (चमे) और बहनों (रिनश्या) का ग्रामीणों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।
समारोह में बेटियों और 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को शाल एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। वर्षों बाद अपनी जन्मभूमि पहुंचीं बेटियां भावुक नजर आईं। उन्होंने कुटी में आयोजित कुंभ पूजा में शामिल होने के अनुभव को तीर्थयात्रा के समान बताया।
पर्वतारोही चंद्रप्रभा ऐतवाल और सुमन कुटियाल दताल भी हुईं शामिल
कुंभ पूजा में पद्मश्री और अर्जुन अवार्ड से सम्मानित 85 वर्षीय पर्वतारोही चंद्रप्रभा ऐतवाल तथा एवरेस्ट विजेता सुमन कुटियाल दताल ने भी भाग लिया। दोनों की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष बना दिया।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सुमन कुटियाल दताल ने वन विभाग के सहयोग से कुटी क्षेत्र में देवदार और बांज के एक हजार पौधे रोपे और उनका वितरण भी किया। उन्होंने स्थानीय लोगों से पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी को बचाने में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
वहीं, पर्वतारोही चंद्रप्रभा ऐतवाल ने कुटी और आदि कैलास तक सड़क सुविधा पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार तथा सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सड़क संपर्क बेहतर होने से सीमांत क्षेत्र के लोगों को आवागमन के साथ-साथ धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों में भी सुविधा मिल रही है।
बारह वर्षों बाद आयोजित इस कुंभ पूजा ने कुटी गांव में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक एकजुटता का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे लोगों ने रं संस्कृति और परंपराओं से जुड़कर अपनी जड़ों को महसूस किया।

