Saturday, March 7, 2026
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इतिहास का सच : भारत के मूल निवासी थे आर्य

राखीगढ़ी (अंग्रेज़ी:Rakhigarhiहरियाणा के हिसार ज़िले में सरस्वती तथा दृषद्वती नदियों के शुष्क क्षेत्र में स्थित एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थान है। राखीगढ़ी सिन्धु सभ्यता का भारतीय क्षेत्रों में धोलावीरा के बाद दूसरा विशालतम ऐतिहासिक नगर है। राखीगढ़ी का उत्खनन व्यापक पैमाने पर 1997-1999 ई. के दौरान अमरेन्द्र नाथ द्वारा किया गया। राखीगढ़ी से प्राक्-हड़प्पा एवं परिपक्व हड़प्पा युग इन दोनों कालों के प्रमाण मिले हैं। राखीगढ़ी से महत्त्वपूर्ण स्मारक एवं पुरावशेष प्राप्त हुए हैं, जिनमें दुर्ग-प्राचीर, अन्नागार, स्तम्भयुक्त वीथिका या मण्डप, जिसके पार्श्व में कोठरियाँ भी बनी हुई हैं, ऊँचे चबूतरे पर बनाई गई अग्नि वेदिकाएँ आदि मुख्य हैं।

प्राचीनतम सभ्यता के साक्ष्य

राखीगढ़ी में दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यता के साक्ष्य मिले हैं। हरियाणा सरकार ने राखीगढ़ी को सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा शहर होने का दावा किया है। उल्लेखनीय है कि यह सभ्यता ईसा पूर्व 7500 वर्ष तक पुरानी है। हरियाणा के पुरातत्व विभाग के अब तक हुए शोध के आधार पर राखीगढ़ी की बसावट का कुल क्षेत्र सात किलोमीटर में फैले होने की संभावना है। पुरातन शहर राखीगढ़ी की आबादी दस से पचास लाख के बीच हो सकती है। इस सभ्यता पर शोध जारी है, कार्य पूरा होने के बाद और महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक जानकारियां सामने आ सकती हैं। इस सभ्यता के पाकिस्तानबलूचिस्तानपंजाबहरियाणा और राजस्थान व अफ़ग़ानिस्तान में होने के भी संकेत हैं। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में पुरातन सभ्यता के मिले साक्ष्यों से यह इलाका बड़ा हो सकता है। राखीगढ़ी में खुदाई से प्राप्त अवशेषों से माना जा रहा है कि यह सिंधु घाटी सभ्यता का दुनिया का सबसे बड़ा चौथा शहर रहा होगा। राखीगढ़ में सड़कें, जल निकासी व्यवस्था और उम्दा किस्म के बर्तन मिले हैं। इससे उस काल के लोगों के जीवन स्तर के बारे में जानकारी मिलती है। वर्ष 1922 से 2015 के बीच सिंधु घाटी सभ्यता के जितने भी साक्ष्य सामने आये हैं, उनमें ज्यादातर सरस्वती नदी के इर्द-गिर्द बसे होने के सबूत मिले हैं। इसलिए सिंधु घाटी सभ्यता को सरस्वती नदी सभ्यता का नाम भी दिया जा सकता है।

राखीगढ़ी में मिले सात स्तूप

राखीगढ़ी में खुदाई के दौरान कुल सात स्तूप मिले हैं। इनमें चार और पांच नंबर स्तूप के नीचे सबसे बड़ी आबादी होने के प्रमाण मिले हैं। सात नंबर स्तूप में अंतिम संस्कार ग्राउंड में मिले सभी नरकंकाल के सिर उत्तर की तरफ हैं। इन कंकाल से यह जानने की कोशिश की जा रही है कि राखीगढ़ी में कितने साल पहले आबादी की बसावट थी।[1]

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