हल्द्वानी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि वर्ष 2011 में लाल चौक पर पाकिस्तान का झंडा लहराता देखकर उनका सिर शर्म से झुक गया था, लेकिन आज उसी लाल चौक पर तिरंगा शान से लहरा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि देश की सोच में आए बड़े बदलाव का प्रतीक है।
गुरुवार को नैनीताल रोड पर आयोजित गौरव सेनानी मिलन समारोह में नितिन नवीन ने 2011 के अपने कश्मीर दौरे का प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि उस समय वह भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री थे और राष्ट्रीय एकता यात्रा की तैयारियों के सिलसिले में कश्मीर पहुंचे थे। लाल चौक पर पाकिस्तान का झंडा देखकर उन्हें बेहद पीड़ा हुई थी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में वह 1962 के बलिदानियों को श्रद्धांजलि देने तवांग के बुमला सीमा क्षेत्र तक पहुंचे थे। उस समय भारत की ओर सड़कें कच्ची और दुर्गम थीं, जबकि चीन की ओर पक्की सड़कें बनी हुई थीं। उन्होंने सवाल उठाया था कि भारतीय सीमा तक बेहतर सड़कें क्यों नहीं हैं। नवीन ने कहा कि वर्ष 2017 में अरुणाचल प्रदेश जाने पर उन्होंने सीमा तक पक्की सड़कें देखीं। उन्होंने इसे वर्ष 2014 के बाद देश की सोच में आए बदलाव का उदाहरण बताया।
नितिन नवीन ने कहा कि अब सीमावर्ती गांवों को देश का ‘अंतिम गांव’ नहीं, बल्कि ‘प्रथम गांव’ माना जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने सैनिकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता। वर्दी उतरने के बाद भी उसके भीतर राष्ट्रप्रेम और देशसेवा का जज्बा कायम रहता है।
उन्होंने वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी), रक्षा उत्पादन और निर्यात का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और सीमाओं को मजबूत करने के साथ-साथ सैनिकों के सम्मान और सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

