Tuesday, March 10, 2026
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खटीमा में जनजाति समुदाय ने अपनी जीवनशौली से रोका कोरोना वायरस

खटीमा। कोरोना संक्रमण देश के कोने-कोने तक फैल चुका है, लेकिन जागरूक लोगों ने कोरोना को मात देने में सफलता हासिल की है। कुछ इसी तरह ही कंजाबाग पटिया गांव के जनजाति समुदाय के लोगों ने अपनी संयमित जीवनशैली के दम पर ही खुद को फिट रखा है। सख्ती से गाइड लाइन का अनुपालन कर गांव में कोरोना संक्रमण को पांव नहीं पसारने दिया।

सीमांत के पटिया गांव में रहने वाली जनजाति समुदाय की आबादी लगभग तीन हजार के आसपास है। उनका मुख्य पेशा कृषि है। इस समुदाय की जीवनशैली खास है। सुबह आठ बजे से पहले भोजन कर लेते हैं। दिन भर खेती किसानी में लगे रहते हैं। सूरज ढलने से पहले रात का भोजन कर लेते हैं। यह परंपरा गांव में आज भी सदियों से चली आ रही है। गांव में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित है, आने से पहले अस्पताल में जांच कराई जाती है।

ग्राम प्रधान ने गांव में कराया सैनिटाइजेशन

ग्रामीण कहते हैं कोरोना काल में अनुशासित और संयमित जीवनशैली की वजह से वे पूरी तरह फिट हैं। सजगता की वजह से कोरोना की दूसरी लहर इस गांव तक नहीं पहुंची। ग्राम प्रधान ने सैनिटाइजर कर गांव में किसी तरह का संक्रमण नहीं आया दिया। शारीरिक दूरी बनाएं हुए हैं। खेती-किसानी का काम नियमित रूप कर अपनी शारीरिक क्षमता को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

महामारी से बचाव को लेकर गांव में सैनिटाइज लगातार कराया गया है। साथ ही गांव में विलेज मॉनीटिरिंग कमेटी गठित है। गांव के लोगों का एक-दूसरे से मिलना-जुलना नियमों के अनुसार किया जाता है। सजगता से गांव में कोरोना को प्रवेश नहीं होने दिया।-

-कमलेशदेवी, ग्राम प्रधान

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