Tuesday, March 10, 2026
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नैनीताल में बलियानाले की पहाड़ी से रिस रहे पानी को लिफ्ट करने का काम अब तक नहीं हुआ शुुरू

नैनीताल : भूगर्भीय दृष्टि से संवेदनशील बलियानाले की पहाड़ी से रीस रहे पानी लिफ्टिंग को बनाई कार्ययोजना पर अब तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। योजना के क्रियान्वयन को गठित कमेटी के नोडल विभाग जल संस्थान के दावे थे कि एक माह के भीतर पानी की उपलब्धता जांचने के लिए क्षेत्र में ट्रायल बोरिंग का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। मगर दो माह बीतने को है अब तक बोरिंग का कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

बता दें कि भूगर्भीय दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाले बलियानाले की पहाड़ी पर वर्षों से भूस्खलन हो रहा है। बीते कुछ वर्षों में रईस होटल से सिपाही धारे तक के करीब 200 मीटर के दायरे में तीन जल स्रोत निकल आए है। जिनसे लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। पहाड़ी से रिस रहे पानी के चलते भूस्खलन की संभावना भी बनी हुई है। यह देखते हुए बीते वर्ष सिंचाई विभाग के सहयोग से आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने क्षेत्र का जियोफिजिकल सर्वे किया था। जिसमें सामने आया था कि पहाड़ी से रोजाना 7 से 8 एमएलडी पानी का रिसाव हो रहा है।

आईआईटी ने जब रिपोर्ट सिंचाई विभाग को सौंपी तो जिला प्रशासन के साथ वार्ता के बाद डीएम धीराज गर्ब्याल द्वारा इस पानी को लिफ्ट कर नैनीताल लाने का सुझाव दिया गया था। जिस पर उनके द्वारा विभिन्न विभागों के अधिकारियों की एक कमेटी भी गठित कर दी थी। साथ ही जून में क्षेत्र का निरीक्षण कर निर्देश दिए थे कि जल्द से जल्द भूमिगत पानी की उपलब्धता जांचने के लिए तीन स्थानों पर बोरिंग की जाए जिसके बाद कमेटी ने स्थलीय निरीक्षण कर तीन स्थानों को बोरिंग के लिए चिन्हित किया था। योजना नोडल विभाग जल संस्थान अधिकारियों का दावा था कि एक माह के भीतर बोरिंग कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। इधर दो माह बीतने को हैं, मगर जल संस्थान द्वारा अभी तक बोरिंग का कार्य शुरू ही नहीं किया गया है।

पानी लिफ्ट कर राजभवन और एरीज क्षेत्र को लाभान्वित करने की थी योजना

पहाड़ी से रोजाना 7 से 8 एमएलडी पानी का रिसाव हो रहा है। योजना के लिए चिन्हित कमेटी द्वारा फिलहाल तीन स्थानों में बोरिंग करने का निर्णय लिया गया था। जिससे भूमिगत जल की उपलब्धता की जांच हो सके। बोरिंग किए गए स्थानों पर यदि एक से दो एमएलडी पानी भी उपलब्ध हो पाया तो इससे राजभवन और एरीज क्षेत्र के लोगों को पेयजल आपूर्ति करने की योजना थी। यदि पानी की उपलब्धता और अधिक रही तो इसे लिफ्ट कर वापस नैनी झील में डालने की योजना तैयार की गई थी।

पानी को स्टोर कर डायरेक्ट लिफ्ट करने की भी है योजना

बलिया नाला पहाड़ी से रिसाव हो रहे पानी को उपयोग में लाए जाने के लिए फिलहाल बोरिंग करके ट्यूबवेल के माध्यम से लिफ्ट करने की योजना तैयार की गई है। भविष्य में पहाड़ी के मुहाने से रीस रहे पानी को स्टोर कर डायरेक्ट लिफ्ट किए जाने की का भी प्लान है। जिससे पहाड़ी से रिस रहा सारा पानी उपयोग में लाया जा सके। साथ ही इसके नीचे की ओर पहाड़ी में भूस्खलन को रोकथाम हो सके। मगर उसके लिए पहले धस रही पहाड़ी का ट्रीटमेंट किया जाना जरूरी है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता संतोष उपाध्याय ने बताया कि ट्रायल बोरिंग के लिए तीन स्थानों का चयन किया गया है। क्योंकि बोरिंग के लिये भारी मशीनों का प्रयोग होता है और क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से संवेदनशील है। इस कारण बरसात के दौरान बोरिंग का कार्य शुरू नहीं हो पाया। जल्द कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।

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