हल्द्वानी। इंटरमीडिएट तक विद्यार्थी स्कूली अनुशासन में रहते हैं और उनकी गतिविधियों पर शिक्षकों की नजर रहती है। उच्च शिक्षा में प्रवेश के बाद उन्हें अधिक स्वतंत्रता मिलती है। ऐसे में युवाओं को नशे से दूर रखने और सही दिशा देने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने एंटी ड्रग अभियान को अनिवार्य बनाया है।
वर्ष 2023 से राज्य के 11 विश्वविद्यालयों के साथ 114 सरकारी, 21 सहायता प्राप्त और 275 निजी महाविद्यालयों में स्नातक प्रवेश के लिए एंटी ड्रग शपथपत्र अनिवार्य किया गया है। नशे को न कहने का प्रमाणपत्र जमा किए बिना विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते हर वर्ष 1.50 लाख से अधिक विद्यार्थी दाखिले के साथ नशामुक्ति का संकल्प ले रहे हैं। अब तक यह आंकड़ा 3.95 लाख से अधिक पहुंच चुका है।
उच्च शिक्षा विभाग का उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और उन्हें उच्च शिक्षा के दौरान नशे की गिरफ्त में आने से बचाना है। साथ ही विद्यार्थियों के माध्यम से समाज में भी नशामुक्ति को लेकर जागरूकता फैलाने पर जोर दिया जा रहा है।
अभियान के प्रभाव को देखते हुए संस्थानों के लिए एसओपी भी तैयार की गई है। रायपुर, नैनबाग और सितारगंज समेत कई क्षेत्रों में विद्यार्थियों की पहल से नशे की गिरफ्त में आए लोगों को सुधारने में मदद मिली है। उच्च शिक्षा विभाग आने वाले समय में इस मुहिम का और विस्तार करने की तैयारी में है।
एंटी ड्रग शपथ के बाद ही छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा है। संस्थानों के लिए एसओपी भी बनाई गई है। इसका प्रभाव भी दिखाई दे रहा है। रायपुर, नैनबाग, सितारगंज सहित कई क्षेत्रों में विद्यार्थियों के माध्यम से नशा करने वालों को सुधारने में मदद मिली है। मुहिम का आगे भी विस्तार किया जाएगा।— प्रो. एएस उनियाल, संयुक्त निदेशक, उच्च शिक्षा

