झूलाघाट। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की सीमा से लगे नेपाल के दार्चुला जिले में भारी बारिश के बीच बड़ी प्राकृतिक आपदा सामने आई है। भट्टाड़ गांव के ऊपर पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा दरकने से भारी भूस्खलन हुआ, जिसके मलबे में चमेलिया नदी का करीब आधा बहाव रुक गया है। नदी का पानी एक स्थान पर ठहरने लगा है, जिससे भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में खतरे की आशंका बढ़ गई है।
बताया जा रहा है कि चमेलिया नदी आगे जाकर काली नदी में मिलती है। ऐसे में भूस्खलन से नदी में बनी झील के अचानक टूटने की स्थिति में काली नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है। इससे झूलाघाट, पंचेश्वर और टनकपुर समेत सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।
तीन जलविद्युत परियोजनाओं पर भी खतरा
भूस्खलन के बाद सबसे बड़ी चिंता चमेलिया नदी पर बनी और निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर है। घटना स्थल से करीब 40 किलोमीटर नीचे गेठीगाड़ा, सिमपानी और नेपाल के सेरा क्षेत्र के पास चमेलिया नदी काली नदी में मिलती है।
इसी क्षेत्र में बलांच में 30 मेगावाट का चमेलिया और 40 मेगावाट का अपर चमेलिया जलविद्युत प्रोजेक्ट संचालित है, जबकि 28 मेगावाट का मध्य चमेलिया प्रोजेक्ट निर्माणाधीन बताया जा रहा है। आशंका है कि यदि भूस्खलन से बनी झील अचानक टूटती है और पानी तेज बहाव के साथ नीचे आता है, तो इसका असर इन परियोजनाओं और काली नदी के जलस्तर पर पड़ सकता है।
प्रशासन ने जारी किया अलर्ट
स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने चमेलिया नदी के किनारे रहने वाले लोगों और संबंधित जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने का अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने और नदी के आसपास न जाने की अपील की है।
फिलहाल भूस्खलन के बाद नदी के बहाव और जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। स्थिति को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में भी प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

