पिथौरागढ़। उत्तराखंड में गर्म पानी के प्राकृतिक स्रोतों के जरिए पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी है। पर्यटन विभाग ने पिथौरागढ़ के मदकोट में हॉट स्प्रिंग के पानी से पर्यटकों को स्नान की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना तैयार की है। योजना के परिणाम सकारात्मक रहने पर इसे राज्य के अन्य गर्म पानी के स्रोतों तक विस्तार दिया जाएगा।
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक समीर तिवारी के अनुसार राज्य में करीब 40 जियो थर्मल स्प्रिंग चिह्नित किए गए हैं। कुमाऊं मंडल में पिथौरागढ़ जिले में गोरी नदी के समानांतर करीब 13 किलोमीटर क्षेत्र में जियो थर्मल स्प्रिंग बेल्ट मौजूद है। इस क्षेत्र में 10 गर्म पानी के स्रोत हैं। इन स्रोतों के पानी का उपयोग बेलोनो थेरेपी, कृषि और अन्य कार्यों में किया जा सकता है।
तनाव प्रबंधन में भी मददगार
वैज्ञानिक समीर तिवारी के अनुसार गर्म पानी के प्राकृतिक स्रोत तनाव प्रबंधन में भी उपयोगी हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि आइसलैंड में जियो थर्मल स्रोतों के इस्तेमाल पर व्यापक स्तर पर काम किया गया है और वहां जियो थर्मल पूल विकसित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि किसी गर्म पानी के स्रोत पर स्नान की सुविधा शुरू करने से पहले पानी में मौजूद विभिन्न तत्वों और उससे निकलने वाली गैसों की जांच जरूरी है। यदि जांच में कोई हानिकारक तत्व नहीं मिलता है, तो निर्धारित तापमान पर स्नान की सुविधा विकसित की जा सकती है।
मदकोट में बनेगा कॉटेज
पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में राज्य में पर्यटन के नए क्षेत्रों को विकसित किया जा रहा है। इसी के तहत पिथौरागढ़ के मदकोट में पर्यटन सुविधाओं को विकसित करने की योजना है।
योजना के तहत मदकोट में कॉटेज विकसित किया जाएगा, जहां पर्यटकों के ठहरने की सुविधा के साथ हॉट स्प्रिंग के पानी से स्नान की व्यवस्था भी होगी। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्नान स्थल बनाए जाएंगे। सुविधा शुरू करने से पहले पानी की गुणवत्ता, सुरक्षा और अन्य आवश्यक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा। इसमें वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान की विशेषज्ञ मदद ली जाएगी।
पर्यटन विभाग का मानना है कि ऐसे नए पर्यटन स्थलों के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को विस्तार मिलेगा।

