Sunday, March 8, 2026
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जसपुर विधानसभा पर किसका लहराएगा परचम,काफी रोचक है इतिहास

जसपुर की स्‍थापना चन्‍द्र वशं के सुप्रसिद्ध सेनापति यशोधर सिंह अधिकारी द्वारा की गयी थी। जिसका नाम यशपुर था सन 1856 में अकबर के जमाने में जसपुर का नाम शाहगीर था और मुख्य थे वन क्षेत्र से घिरा होने के बावजूद यहां छपाई का काम प्रमुखता से होता था 18 नवंबर अट्ठारह सौ इक्यावन को नगर निकाय का गठन किया गया पंडित बद्री दत्त पांडे बताते हैं कि अट्ठारह सौ छप्पन को टाउन एक्ट लागू हो गया था ।

जसपुर में सन 1962 से जंगल से घिरा होने के कारण यहां लकड़ी का आयात निर्यात काफी तेजी से होता है जिससे जसपुर की लकड़ी मंडी को एशिया की सबसे बड़ी लकड़ी मंडी होने का भी खेतान मिलता है परंतु 1958 से लेकर जब शुरू है छपाई का काम प्रचलित था और जयपुर में जगह जगह पर छपाई के कैलेंडर हुआ करते थे जापान भारी मात्रा में लोगों को छपाई के माध्यम से रोजगार मिलता रहता था।

राजनीतिक पृष्ठभूमि :-

जसपुर नगर पालिका को चतुर्थ श्रेणी का दर्जा 1958 प्राप्त हुआ जिसकी विधानसभा 8.50 मील दूर काशीपुर में पड़ती थी जो समय उत्तर प्रदेश का एक शहर हुआ करता था । 9 नवंबर 2000 उत्तराखंड बनने के बाद जसपुर विधानसभा का अस्तित्व 2002 सामने आया जिसमें प्रथम बार निर्दलीय चुनाव लड़े डॉक्टर शैलेंद्र मोहन सिंघल विजय है।

बाद उसके अपना समर्थन कांग्रेस को दिया और आगामी 2016 तक सत्ता पर काबिज रहे हैं। 2016 में कांग्रेस से 9 विधायकों संघ बगावत करने पर उन्हें अपनी विधायकी खोनी पड़ी और भाजपा में शामिल हो गए जिसस 2017 में भाजपा से कांग्रेस में आए आदेश सिंह चौहान को जनता ने एक तरफा वोट देकर भाजपा के प्रत्याशी डॉक्टर शैलेंद्र मोहन सिंघल को करारी शिकस्त दी ओर आदेश चौहान जसपुर के विधायक बने

जसपुर के विधायक आदेश चौहान वर्ष 2017 के चुनावों से पूर्व बीजीपी में थे उसके बाद जैसे ही जसपुर के पूर्व विधायक डॉ.शलेन्द्र मोहन सिंगल कांग्रेस कक दमन छोड़ बीजीपी का दामन थामा वैसे ही बीजीपी के आदेश चौहान ने बीजीपी का दामन छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया और कांग्रेस पार्टी ने आदेश चौहान को सन 2017 में विधान सभा जसपुर से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया और चौहानों का ज्यादा दबदबा होने के चलते 3 बार के विधायक रहे कांग्रेस पार्टी से आये बीजीपी के जसपुर प्रत्याशी डॉ. शलेन्द्र मोहन सिंगल को हरा कर अपनी जीत हांसिल की।

राज्य विभाजन के बाद वर्ष 2002 में पहली बार विधान सभा चुनाव हुए जिसमे कांग्रेस और बीजेपी को मात देते हुए निर्दलीय उम्मीदवार डॉ.शलेन्द्र मोहन सिंगल ने विजय पताका लहराया। वर्ष 2007 के चुनाव में निर्दलीय विधायक कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और उन्हें कांग्रेस पार्टी ने जसपुर से अपना प्रत्याशी घोषित किया जहां एक बार फिर बीजीपी पार्टी को को मात देते हुए कांग्रेस के प्रत्याशी डॉ शलेन्द्र मोहन सिंगल विजय हुए। वर्ष 2012 में एक बार फिर कांग्रेस पार्टी ने डॉ शलेन्द्र मोहन सिंगल पर किस्मत आजमाई ओर तीसरी बार शलेन्द्र मोहन सिंगल जसपुर विधान सभा से विजय रहे।

वर्ष 2017 में राजनीति हलचल के चलते कांग्रेस पार्टी से बगाबत कर डॉ शलेन्द्र मोहन सिंगल ने बीजीपी का दामन थामा ओर बीजीपी ने जसपुर से डॉ शलेन्द्र मोहन सिंगल को अपना प्रतयाशी घोषित किया और बीजीपी से नाराज़ होकर आदेश चौहान कांग्रेस में आ गए जहाँ कांग्रेस ने आदेश चौहान को अपना प्रतयाशी बनाया जिससे आदेश चौहान ने तीन बार के रहे विधायक डॉ शलेन्द्र मोहन सिंगल को हरा कर अपनी जीत हांसिल की।

प्रसिद्ध धार्मिक स्थल

जसपुर का कालू से एक बाबा का मजार बताते हैं कि इतिहासकार बताते हैं कि कालू शहीद बाबा का मजार सदियों साल पुराना है धर्म का प्रचार करते हुए कालू से यह बाबा अपने लाव लश्कर के साथ धार्मिक यात्रा पर निकले हुए थे हजरत निजामुद्दीन औलिया से अपना पड़ाव बनाया और लोगों को धार्मिक बातों का ज्ञान दिया पहाड़ों की यात्रा करते हुए पतरामपुर के जंगलों के अंदर उनकी वफात होने का जिक्र जिक्रे खासकर बताते हैं और लिखते हैं कि उनकी वफात होने पर पतरामपुर के जंगलों में उनको दफन कर दिया गया था जिसकी मजार हेलो अपनी मनाते लेकर जाते हैं और उनकी मन्नते पूरी होती हैं

ठाकुर का मंदिर

जसपुर के 2 मंदिरों में से प्रमुख ठाकुर मंदिर की स्थापना 1930 में रघुनाथ ठाकुर ने करवाया था में ठाकुरों ने बनवाए मंदिर पर ठाकुरों के मंदिर के नाम से जाना जाता है जिसमें हिंदू अपना पर धूमधाम से मनाते हैं जिसे पहले होली वाले मंदिर के नाम से भी जाना जाता है

बड़ा मंदिर

बड़ा मंदिर प्राचीन काल से उन्नीस सौ के दशक के आसपास कर आए हैं जहां पर पाए थे वाले मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है यहां पर हर साल रावण को रोकने के लिए मेले का आयोजन किया जाता है जो मुख्यतः आसपास के क्षेत्रों का आकर्षण का केंद्र होता है

सामाजिक तानाबाना

जसपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड उधमसिंहनगर जिले में स्थित है। यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 98,839 मतदाता थे। ये जातीय समीकरण के हिसाब से चौहान जाति के लोगो का ज्यादा दबदबा है जिससे यहां पर आदेश चौहान को जीत हांसिल हुई थी। अनुमान के मुताबिक यहां करीब 35 प्रतिशत चौहान, 9 प्रतिशत एसटी एससी के वोटर हैं, इसके बाद करीब 10 प्रतिशत सिख 5 हजार यादव,8 प्रतिशत ब्राह्मण, 2 प्रतिशत राजपूत, 25 प्रतिशत मुस्लिम करीब 8 प्रतिशत ओबीसी , 5 प्रतिशत पंजाबी, 5 प्रतिशत ठाकुर ,6 प्रतिशत बनिया, 3 प्रतिशत अन्य जातीय प्रतिशत वोटिंग रहा है ।

2017 का जनेदेश

2017 के विधानसभा चुनाव में जसपुर सीट पर कुल 5 प्रत्याशी मैदान में थे, लेकिन मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच रहा। जसपुर सीट पर कुल 115782  मतदाता थे । 130828 इस तरह से 76.67 फीसदी मतदान रहा था। बीजीपी के डॉ. शलेन्द्र मोहन सिंगल 38347 वोट मिले जबकि कांग्रेस प्रत्याशी आदेश चौहान को 42351 मत मिले. जहाँ कांग्रेस से यशपाल आर्य 4040 वोटों से जीते।  2017 में आदेश चौहान विधायक चुने गए ।

जसपुर विधायक का रिपोर्ट कार्ड

आदेश  सिंह चौहान 2014 से पहले भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में संगठन में थे 2013 में लव जिहाद का मुद्दा उठाकर अपनी अमर्यादित भाषा एक कम्युनिटी को लेकर टारगेट करने पर पर चर्चा में आए जिसमें अनुरूप सड़क जाम कर  पुलिस द्वारा लाठीचर्ज  किया गया था पुलिस द्वारा का मुकदमा भी दर्ज हुआ जिसमें विधायक आदेश सिंह चौहान सहित 5 लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ था 2014 में भाजपा से टिकट मिला और कांग्रेस के डॉक्टर शैलेंद्र मोहन सिंघल के सामने चुनाव हारे परंतु 2017 में कांग्रेस से बगावत कर भाजपा पहुंचे डॉ शैलेंद्र मोहन सिंघल और विधायक आदेश सिंह चौहान को कांग्रेस से टिकट मिला चौहान द्वारा ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के लिए दर्जनों घोषणा की गई परंतु साडे 4 साल बीत जाने के बाद धरातल पर विधायक आदेश सिंह चौहान अपने मुख्य वादे पूरे करने में नाकाम साबित हुए जिसमें मुख्य जसपुर बस स्टैंड का निर्माण, स्टेडियम का निर्माण और कुंडा में पानी की टंकी का निर्माण मुख्य केंद्र थे परंतु जसपुर  विधायक आदेश चौहान मुख्य के सभी कार्य को कराने में असफल साबित हुए

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