बदरीनाथ धाम में दान और चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बदरीनाथ के विधायक लखपत बुटोला ने मंगलवार को बदरीनाथ मंदिर परिसर में समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ उपवास शुरू कर दिया। कांग्रेस ने इस आंदोलन का ऐलान सोमवार को किया था। विधायक बुटोला ने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
मंदिर परिसर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के खिलाफ नाराजगी जताई। इस बीच जांच एजेंसियों ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की पिछले 40 दिनों की फुटेज सुरक्षित कर ली है। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि दो जुलाई को सामने आई घटना पहली बार हुई थी या पहले भी चढ़ावे की गणना के दौरान इसी तरह की अनियमितताएं होती रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से हर वर्ष दान और चढ़ावे की गणना के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है। इस वर्ष गठित टीम में आरोपी अधिकारी भी शामिल था। ऐसे में जांच केवल दो जुलाई की घटना तक सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि पूर्व में हुई दान गणनाओं की गतिविधियों की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि चढ़ावे की गणना स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की 40 दिन की फुटेज सुरक्षित रखी गई है। जांच के दौरान सभी रिकॉर्डिंग का परीक्षण किया जाएगा। यदि किसी अन्य दिन भी किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मामले में आरोपी अधिकारी की नियुक्ति और जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वर्ष 2003 में उसे इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर अस्थायी नियुक्ति मिली थी। वर्ष 2014 में उसे स्थायी किया गया और बाद में बीकेटीसी अध्यक्ष के निजी सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2026 में पहली बार उसकी तैनाती बदरीनाथ धाम में की गई, जहां उसे थाली भेंट गणना और प्रोटोकॉल नोडल अधिकारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थीं।
इधर, दान-चढ़ावे की गणना के लिए बनाई गई छह सदस्यीय टीम को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। टीम के नोडल और सब-नोडल अधिकारी 30 जून को सेवानिवृत्त हो चुके थे, लेकिन उनकी जगह किसी अन्य अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई। ऐसे में दो जुलाई को हुई दान गणना के दौरान आरोपी अधिकारी की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है।

