देहरादून/टिहरी: नरेंद्रनगर राजदरबार में भगवान बदरी विशाल की नित्य महाभिषेक पूजा के लिए तिलों का पवित्र तेल पारंपरिक विधि से तैयार किया जा रहा है। इस धार्मिक प्रक्रिया में माला राज्य लक्ष्मी शाह समेत अन्य सुहागिन महिलाएं भाग ले रही हैं।
यह तिलों का तेल विशेष रूप से तैयार कर तेल कलश ‘गाडू घड़ा’ में भरा जाएगा, जिसका उपयोग बदरीनाथ धाम में भगवान बदरी विशाल के अभिषेक में किया जाएगा।
आज निकलेगी शोभायात्रा
तैयार तेल कलश की शोभायात्रा आज शाम नरेंद्रनगर से ऋषिकेश के लिए प्रस्थान करेगी। यह यात्रा दो चरणों में डिम्मर गांव (पुजारी समुदाय का मूल ग्राम) होते हुए बदरीनाथ मार्ग से 22 अप्रैल को धाम पहुंचेगी। 23 अप्रैल को कपाट खुलने के साथ ही इस तेल कलश को गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।
8-10 घंटे की कठिन प्रक्रिया
तिलों का तेल पिरोने की पूरी प्रक्रिया में लगभग 8 से 10 घंटे का समय लगता है। इस कार्य के लिए केवल अनुभवी और परंपराओं का ज्ञान रखने वाली सुहागिन महिलाओं को ही चुना जाता है। जिन महिलाओं के परिवार में हाल ही में शोक हुआ हो, उन्हें इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल नहीं किया जाता।
सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन
महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह ने बताया कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और राजपरिवार इसे पूरी श्रद्धा से निभा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को भी इस परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि बदरीनाथ धाम से जुड़ी धार्मिक विरासत अक्षुण्ण बनी रहे।
गौरतलब है कि कपाट खुलने के साथ ही इसी पवित्र तेल से भगवान बदरी विशाल का महाभिषेक किया जाएगा, जिसका विशेष धार्मिक महत्व है।

