Saturday, March 7, 2026
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विपक्ष ने सत्र के दौरान शिक्षा मंत्री पर दागे सवाल


देहरादून। संवाददाता। सूबे की शिक्षा का क्या हाल है? इसकी बानगी और सच का खुलासा आज खुद शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय ने किया। प्रश्नकाल के दौरान आज विधानसभा सत्र के सातवें दिन जब कांग्रेस विधायकों ने उन पर सवाल दागे तो शिक्षा मंत्री असहज नजर आये। जहंा वह कई सवालों का जवाब नहीं दे सके वहीं उनके जवाब से कई सनसनीखेज खुलासे भी हुए।

कांग्रेस विधायक देशराज कर्णवाल ने उनस पूछा कि प्रति नियुक्ति पर पहाड़ों में कितने शिक्षक तैनात किये गये है। इस सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री ने बताया कि अब तक दो शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर वापस आये है। राज्य के सैकड़ों शिक्षक जिनकी तैनाती तो पहाड़ पर है लेकिन वह अभी अपनी सेवाएं उत्तर प्रदेश और बिहार में दे रहे हैं। इन शिक्षकों के बारे में शिक्षा मंत्री का कहना है कि प्रतिनियुक्ति वाले शिक्षकों को शीघ्र वापस लाया जायेगा। कांग्रेस विधायक मनोज रावत ने शिक्षा मंत्री से पूछा कि स्कूलों में योग शिक्षकों की नियुक्ति कब की जायेगी तो शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा अभी तक योग शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कोई नीति नहीं बनायी गयी है। पूरक प्रश्न के तौर पर पूछा गया कि जब योग शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जानी है तो राज्य में योग शिक्षकों की टे्रनिंग व कोर्स क्योें कराये जा रहे है? जिसका कोई जवाब शिक्षा मंत्री नहीं दे सके।

शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय से कांग्रेस विधायक ने सरकारी स्कलों में छात्रों को पुस्तक व डै्रस दिये जाने की स्थिति पर पूछा गया तो वह यह कहकर अपना बचाव करते दिखे कि प्रक्रिया गतिमान है। यही नहीं स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े सवाल पर जब उनसे राज्य में शौचालय विहीन स्कूलों के बारे में जानकारी मांगी गयी तो उन्होने कहा कि राज्य में अभी 384 स्कूलों में शौचालय नहीं है। एक तरफ सरकार द्वारा राज्य को खुले में शौच से मुक्त होने का दावा किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर राज्य के 384 स्कूलों में शौचालय न होना सरकार की कथनी व करनी के फर्क को बताने के लिए काफी है। शिक्षा मंत्री के जवाबों से राज्य में शिक्षा की दयनीय स्थिति का तो खुलासा होता ही है साथ ही वह कितनी तैयारी से सदन में आते है इसका भी पता चलता है।

हर बार मंत्रियों की कम तैयारी के कारण सरकार की किरकिरी होती है। वहीं सत्ता पक्ष के विधायकों के सवालों पर खुद सरकार घिरी हुई नजर आयी। कुंवर चैम्पियन द्वारा मनरेगा के मानदेय के फर्क पर सरकार से पूछा गया कि राज्य में मनरेगा मजदूरों को दूसरे राज्यों से मजदूरी कम क्यों दी जाती है उन्होने हरियाणा में 177 रूपये व राज्य में 175 रूपये मजदूरी देने पर सवाल उठाया। जिसका कोई संतोष जनक उत्तर सरकार नहंीं दे सकी।

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