देहरादून। उत्तराखंड में जीएसटी चोरी करने वालों के खिलाफ राज्य कर विभाग (स्टेट जीएसटी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हरिद्वार में चार फर्मों पर एक साथ छापेमारी की। विशेष अनुसंधान शाखा (एसआइबी) की इस कार्रवाई में करोड़ों रुपये के कर घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच के दौरान स्टॉक और कर अभिलेखों में भारी अनियमितताएं मिलने पर विभाग ने मौके पर ही दो करोड़ रुपये टैक्स और जुर्माना वसूल किया।
यह कार्रवाई राज्य कर आयुक्त Prateek Jain के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ फर्में अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ उठाकर जीएसटी रिटर्न में नकद कर भुगतान बेहद कम या शून्य दिखा रही हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित फर्में आपस में सर्कुलर ट्रेडिंग कर कारोबार को कृत्रिम रूप से बढ़ा रही थीं और कर देनदारी से बचने का प्रयास कर रही थीं। कार्रवाई के लिए विभाग ने विशेष अनुसंधान शाखा, सचल दल और ऑडिट इकाई के कुल 12 अधिकारियों की चार अलग-अलग टीमें गठित की थीं।
टीमों ने संबंधित प्रतिष्ठानों पर पहुंचकर खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और उपलब्ध स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया। जांच के दौरान स्टॉक और ली गई इनपुट टैक्स क्रेडिट के आंकड़ों में बड़ी विसंगतियां सामने आईं, जिससे कर चोरी की आशंकाएं और मजबूत हो गईं।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान ही संबंधित फर्मों ने दो करोड़ रुपये जमा करा दिए। साथ ही जीएसटी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी जब्त कर लिए गए हैं। अब विस्तृत जांच के बाद वास्तविक कर देनदारी और जुर्माने का निर्धारण कर आगे की वसूली की जाएगी।
राज्य कर आयुक्त प्रतीक जैन ने कहा कि फर्जी आईटीसी के जरिए कर चोरी करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य कर विभाग का विशेष अभियान आगे भी जारी रहेगा और कर अपवंचन करने वाली संदिग्ध फर्मों पर लगातार निगरानी और कार्रवाई की जाएगी।

