देहरादून। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने हिंदुओं की घटती जनसंख्या को लेकर चिंता जताते हुए समाज में जागरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया है। हरिद्वार में आयोजित विहिप की केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में संत समाज ने हिंदू परिवारों में एक बच्चे की प्रवृत्ति छोड़कर दो से तीन बच्चे पैदा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव दंडी स्वामी जितेंद्रानन्द सरस्वती ने कहा कि हिंदुओं में घटती प्रजनन दर और बदलते जनसांख्यिकीय संतुलन को लेकर गंभीर मंथन किया गया। उन्होंने कहा कि विहिप का चिंतन अब केवल मंदिरों और धार्मिक प्रतीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की संरचना, परिवार व्यवस्था और भविष्य के भारत की जनसंख्या तस्वीर तक विस्तारित हो चुका है।
बैठक में संत समाज ने कहा कि हिंदू समाज की कई जातियों और वर्गों में प्रजनन दर 1.5 प्रतिशत से नीचे पहुंच चुकी है, जो चिंता का विषय है। इस स्थिति के सामाजिक प्रभावों पर भी चर्चा की गई। साथ ही चर्च और मिशनरी गतिविधियों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सीमावर्ती राज्यों, विशेषकर पश्चिम बंगाल में धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियां बढ़ाने पर जोर दिया गया।
संत समाज ने लिव-इन रिलेशनशिप व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए पारिवारिक कानूनों की समीक्षा की मांग की। संतों का कहना था कि भारतीय परिवार व्यवस्था केवल पति-पत्नी के निजी संबंधों तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों का आधार है। उनका मानना है कि लिव-इन संबंधों को कानूनी संरक्षण मिलने से समाज और कानून के सामने नए प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
बैठक में यह भी कहा गया कि हिंदू समाज में बहुविवाह की अनुमति नहीं है, जबकि लिव-इन संबंधों से जुड़े कानूनी अधिकारों के विस्तार ने सामाजिक और कानूनी स्तर पर नई चुनौतियां पैदा की हैं।

