देहरादून। सावन की शिवरात्रि के मौके पर मंगलवार को पहाड़ से मैदान तक शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंज उठे। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र, भांग, धतूरा समेत अन्य प्रिय वस्तुएं अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।
इस वर्ष श्रावण शिवरात्रि कई दुर्लभ ज्योतिषीय संयोगों के बीच मनाई जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार गजकेसरी योग, गुरु आदित्य योग, बुध आदित्य योग और पंचग्रही योग का विशेष संयोग बन रहा है। इसके अलावा मंगलवार, पुनर्वसु व पुष्य नक्षत्र, सिद्धि योग और कर्क राशि में चंद्रमा की स्थिति भी इस पर्व को विशेष शुभ बना रही है।
जानकारों के मुताबिक करीब 135 वर्षों बाद ऐसे दुर्लभ संयोगों के बीच श्रावण शिवरात्रि का पर्व आया है। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती के साथ मंगल, बृहस्पति, शनि और चंद्रमा का विशेष प्रभाव रहने की बात कही जा रही है। मंगलवार को भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है। वहीं पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि और कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा हैं। बृहस्पति भी चंद्रमा के साथ शुभ स्थिति में गोचर कर रहे हैं।
हालांकि, इस बार शिवरात्रि पर कर्क राशि यानी मृत्यु लोक की भद्रा भी रहेगी। चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 4:55 बजे शुरू हुई और इसी समय से भद्रा भी प्रारंभ होकर दोपहर 3:25 बजे तक रही। विद्वानों के अनुसार मृत्यु लोक की भद्रा में शुभ कार्य और जलाभिषेक करना शास्त्रसम्मत नहीं माना जाता। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए भद्रा समाप्त होने के बाद जलाभिषेक करना अधिक शुभ माना गया।
आचार्य राकेश शुक्ला ने बताया कि शिवरात्रि पर भगवान शिव का जल से अभिषेक करने के साथ बेलपत्र, भांग, धतूरा और अन्य प्रिय वस्तुएं अर्पित करने का विशेष महत्व है। उन्होंने श्रद्धालुओं से विधि-विधान और श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने की अपील की।

