गदरपुर। तहसील क्षेत्र में कूटरचित अभिलेखों के आधार पर स्थायी निवास, जाति और अन्य प्रमाण-पत्र बनवाने के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। जांच में सामने आए मामलों में प्रमाण-पत्र निरस्त करने के साथ ही संबंधित लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। प्रकरण में भूमिका सामने आने पर गदरपुर निवासी निखिल वर्मा और शुभम हुडिया को तहसील प्रशासन ने पूछताछ के बाद गदरपुर कोतवाली पुलिस को सौंप दिया है। दोनों के खिलाफ अभी मुकदमा दर्ज होना बाकी है।
तहसीलदार लीना चंद्रा ने शुक्रवार को बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ लोगों ने कूटरचित अभिलेखों के आधार पर विभिन्न प्रमाण-पत्र तैयार करवाए थे। इन प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल देहरादून में नीट परीक्षा के बाद एमबीबीएस में प्रवेश हासिल करने के उद्देश्य से किया जाना था।
प्रशासन के अनुसार, अब तक पांच लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कूटरचित अभिलेखों के आधार पर जारी स्थायी और अनाथ प्रमाण-पत्र निरस्त किए गए हैं। वहीं, जाति प्रमाण-पत्रों के संबंध में नियमानुसार जिला स्क्रूटनी समिति को संस्तुति भेजी गई है।
मोबाइल फोन में मिले रिकॉर्ड और दस्तावेज
जांच में निखिल वर्मा और शुभम हुडिया की भूमिका सामने आने के बाद दोनों से गहन पूछताछ की गई और उनके बयान दर्ज किए गए। जांच के दौरान दोनों के मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। प्रशासन के मुताबिक, मोबाइल फोन में प्रकरण से संबंधित रिकॉर्डिंग और दस्तावेज पाए गए हैं। आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के लिए दोनों मोबाइल फोन पुलिस के सुपुर्द कर दिए गए हैं।
पूछताछ और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद दोनों युवकों को गदरपुर कोतवाली पुलिस को सौंप दिया गया। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।
तहसीलदार लीना चंद्रा ने बताया कि उप जिलाधिकारी के नेतृत्व में जांच की कार्रवाई देर रात से सुबह करीब तीन बजे तक चली। कार्रवाई के दौरान उप जिलाधिकारी डॉ. अमृता शर्मा, तहसीलदार लीना चंद्रा धामी, राजस्व निरीक्षक विनोद कुमार समेत संबंधित राजस्व कर्मी और पटवारी मौजूद रहे।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कूटरचित अभिलेख तैयार कर सरकारी प्रमाण-पत्र हासिल करने या उनके आधार पर अनुचित लाभ लेने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आने पर उनके खिलाफ भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

