हरिद्वार के चंडीघाट स्थित ब्रह्मकुंड से श्रावण मास के पावन अवसर पर शंकर (पूर्व नाम शहजाद) और सावित्री (पूर्व नाम रजिया) दंपती ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ दूसरी बार कांवड़ जल उठाया। दोनों अपनी जन्मभूमि बहेड़ी गुर्जर में शिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए रवाना हुए।
कांवड़ यात्रा शुरू करने से पहले दंपती ने तीर्थाचार्य संत राम विशाल दास महाराज का आशीर्वाद लिया। उनके मार्गदर्शन में पंडितों ने वैदिक रीति से जल पूजन कराया। इसके बाद दोनों ने परमपूज्य बाबा हठयोगी महाराज से भी आशीर्वाद लिया। इस दौरान हितेश दास महाराज, महातार शास्त्री समेत कई श्रद्धालु मौजूद रहे।
संत राम विशाल दास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म किसी पर बलपूर्वक मत परिवर्तन का समर्थन नहीं करता। श्रद्धा, स्वतंत्र इच्छा और पूर्वजों की संस्कृति के प्रति आस्था के आधार पर सनातन मार्ग अपनाने वालों का सम्मान के साथ स्वागत किया जाता है। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में शिवभक्ति के साथ दंपती का अपनी जन्मभूमि में जलाभिषेक के लिए जाना उनके धार्मिक संकल्प और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है।
वहीं शंकर ने कहा कि सनातन धर्म में उन्हें पूजा, परंपरा, जीवन जीने की स्वतंत्रता और संस्कारों का अनुभव हुआ है। श्रावण मास में दूसरी बार कांवड़ जल उठाना उनके लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव है। उन्होंने कहा कि सभी के पूर्वज इस भूमि और इसकी सनातन परंपराओं से जुड़े रहे हैं, इसलिए लोगों को अपनी जड़ों को समझने और सत्य जानने का प्रयास करना चाहिए।

