हरिद्वार। योग गुरु स्वामी रामदेव ने सनातन धर्म और वैदिक परंपराओं पर सवाल उठाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि वेदों में भेदभाव नहीं, बल्कि समस्त मानवता के कल्याण का संदेश निहित है। सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने, प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने और विश्व कल्याण का मार्ग है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं का मूल्यांकन पूर्वाग्रह के बजाय तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
कनखल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत की पहचान उसकी ऋषि परंपरा, वेदों, उपनिषदों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। अपनी परंपराओं को जाने बिना उन पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सनातन की मूल भावना समन्वय, सह-अस्तित्व, करुणा और विश्व कल्याण की है।
वेदों का संदेश किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं
स्वामी रामदेव ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को पूर्वाग्रह के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। वेदों का संदेश किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है। भारतीय परंपरा ने सदियों से विचारों के आदान-प्रदान, आध्यात्मिक चिंतन और ज्ञान की विभिन्न धाराओं को स्थान दिया है।
उन्होंने कहा कि योग, आयुर्वेद, अध्यात्म और वैदिक ज्ञान की प्रासंगिकता आज पूरी दुनिया में महसूस की जा रही है। भारतीय संस्कृति का महत्व किसी अन्य धर्म या परंपरा को छोटा साबित करने में नहीं, बल्कि अपने ज्ञान और जीवन मूल्यों को समझने में है।
प्राच्यविद्या सम्मेलन में उठेंगे सनातन से जुड़े मुद्दे
स्वामी रामदेव ने कहा कि भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 52वें सम्मेलन में सनातन धर्म और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान श्रीराम और माता सीता को मांसाहार एवं शराब से जोड़कर प्रस्तुत करने, भगवान श्रीकृष्ण के महारास को दोषपूर्ण बताने और भगवान शिव को नशे से जोड़कर दिखाने जैसे प्रयास भारतीय परंपराओं की छवि को प्रभावित करते हैं।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन में इन विषयों पर विचार-विमर्श कर भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के मूल स्वरूप को सामने रखने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही, सनातन धर्म के संबंध में लगाए जाने वाले आरोपों का जवाब तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था से ही सत्ता परिवर्तन संभव: रामदेव
देश की राजनीतिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत में लोकतंत्र मजबूत है और यहां सत्ता परिवर्तन संवैधानिक तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि भारत के पास सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस और न्यायपालिका जैसी संस्थाएं हैं। ऐसे में श्रीलंका, बांग्लादेश या नेपाल जैसे देशों में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों की तर्ज पर भारत में तख्तापलट होने की उम्मीद करना उचित नहीं है।
रामदेव ने कहा कि जिन लोगों को सत्ता में आना है, वे लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़कर सत्ता हासिल कर सकते हैं। सड़कों पर आंदोलन या बगावत के जरिए सत्ता परिवर्तन करना भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का विकल्प नहीं हो सकता।

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