जोहार घाटी में छह किमी तक अब भी जमी है गोरीगंगा, कई सालों बाद हुआ एैसा


डीडीहाट। जोहार घाटी में लास्पागाड़ से नहर देवी तक छह किमी क्षेत्र में गोरीगंगा अब भी जमी हुई है। पिछले वर्षों तक 15 मई तक ग्लेशियर पिघल जाते थे, लेकिन इस बार ज्यादा हिमपात होने से बर्फ जमी हुई है। इससे मिलम और उसके आसपास के ग्रामीणों को प्रवास पर जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। लोनिवि की टीम ने स्थलीय निरीक्षण कर अधिशासी अभियंता को रिपोर्ट सौंप दी है।

लोनिवि के जेई महेश कुमार पिछले हफ्ते मुनस्यारी-मिलम मार्ग का जायजा लेने लास्पा गांव तक गए थे। उन्होंने बताया कि लास्पागाड़ से नहरदेवी तक छह किमी क्षेत्र में गोरीगंगा अब भी जमी हुई है। नहर देवी से आगे ही पानी बह रहा है। ऊपरी क्षेत्र में मिलम, टोला, मर्तोली, लास्पा, नहर देवी और सीमा का अंतिम गांव दुंग तक ग्रामीण प्रवास पर जाते हैं। यह पूरा क्षेत्र बर्फ से पटा हुआ है। ग्लेशियरों को काट कर रास्ता बनाने का प्रयास किया जा रहा है। लोनिवि ने मार्ग में बर्फ हटाने के लिए श्रमिक लगाए हैं लेकिन उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

अधिशासी अभियंता एके बर्मन ने बताया कि रास्ते से बर्फ साफ करने के लिए अतिरिक्त श्रमिकों को लगाने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है। उन्होंने बताया कि बर्फ के ऊपर रास्ता बनाया जाएगा। टोला गांव के नाथ सिंह टोलिया ने बताया कि नौ वर्ष पूर्व गोरीगंगा जमने की स्थिति हुई थी। तब से इस बार ही ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पूर्व भी क्षेत्र में बर्फबारी हुई थी। पिछले वर्षों तक15 से 20 मई के बीच अधिकांश ग्लेशियर पिघल जाते थे। इस बार अभी ग्लेशियर पिघलना शुरू नहीं हुए हैं। इससे प्रवास पर जाने वाले ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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