कौन देगा बिलखती मांआें के आंशुओं का जवाब

टिहरी। संवाददाता। जब शिक्षा का मंदिर पैसे उगाहने की दुकान में तब्दील हो जाए, जब व्यवस्था को बनाए रखने के ज़िम्मेदार अधिकारी मामूली फ़ायदे के लिए नाकाबिल को प्रमोट करे और जब मजबूर मां-बाप अपने बच्चों के भविष्य के लिए छोटे-छोटे समझौते करें तो टिहरी जैसे दर्दनाक हादसों का आधार तैयार होता है। टिहरी ज़िला अस्पताल में मौत का सन्नाटा दिल चीर देने वाली मांओं के रूदन से टूट रहा है। इन माओं ने अपने कलेजे के टुकड़े खो दिए हैं, आज सुबह स्कूल गए 9 मासूम अब कभी घर नहीं लौटेंगे।

खाई में बिखरे मासूमों के निशान

टिहरी के लंबगांव और मदननेगी के बीच 19 बच्चों को लेकर जा रही 9 सिटर मैक्स खाई में जा गिरी और भविष्य संवारने के लिए स्कूल जा रहे 9 नौनिहाल अब सिर्फ़ यादों में बसकर रह गए। दुर्घटना में चार बच्चों की मौके पर मौत हो गई और पांच अन्य ने खाई से निकालते और हॉस्पिटल ले जाते समय दम तोड़ दिया।

खाई में बिखरे पडे स्कूल बैग, लंच बाक्स, कॉपी-किताबें जिसने भी देखीं, उसका कलेजा मुंह को आ गया। दुर्घटना की सूचना आग की तरह फैली और चारों ओर चीख-पुकार मच गई। कोई कुछ समझ नहीं पा रहा था। अभी-अभी जिन मासूमों को माता-पिता ने बड़ी हिफाजत के साथ, संवार कर स्कूल के लिए भेजा था, वह चंद क्षणों में ही इतनी दूर चले गए कि फिर न लौट पाएंगे।

आखिरी हादसा तो नहीं
बौराड़ी में टिहरी ज़िला अस्पताल में रखे चार से 13 साल के ऋषभ, ईशान, साहिल, आदित्य, वंश, अभिनव, विहान, अयान के शवों को जिसने भी देखा वह अपने आंसू नहीं रोक पाया। मांओं की चीत्कार पत्थर दिल को भी छलनी कर रही थी लेकिन क्या यह आखिरी हादसा होगा? क्या फिर किसी मां को अपने कलेजे के टुकड़े को नहीं खोना पड़ेगा?
ढाई घंटे बाद पहुंची एंबुलेंस

यह भी बता दें कि काल बनकर आई इस मैक्स को 20 साल का लड़का चला रहा था जिसे गाड़ी चलाना का बहुत ज़्यादा अनुभव नहीं था। 108 एंबुलेंस और प्रशासन को मौके पर पहुंचने में ढाई घंटे लग गए। स्कूल प्रबंधन मौके पर पहुचंना तो दूर, स्कूल बंद कर गायब हो गया. गुस्साए ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने तीन दिन पहले ही स्कूल पर दबाव डालकर इस मैक्स को स्कूल वैन के रूप में लगवाया था क्योंकि मैक्स चालक उसका परिचित है।

मुख्यमंत्री ने बयान देकर दुख जताया और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय घायल मासूमों को देखने ऋषिकेश एम्स पहुंचे। लेकिन इन मासूमों की मौत का ज़िम्मेदार कौन है? इस सवाल का जवाब न अधिकारियों के पास है, न सरकार के पास।

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