आरटीओं में खुद आवेदन को पहुंची महिला अधिकारी

देहरादून। संवाददाता। चार दिन पहले प्रदेश के परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने हरिद्वार में दावा किया था कि आरटीओ कार्यालयों में दलाली बंद की जाएगी। हालांकि रुड़की स्थित एआरटीओ कार्यालय में दलालों की सक्रियता की जांच को पहुंची ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के निरीक्षण में यह दावे हवा हो गए। सामान्य आवेदक की भांति पहुंची ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को कार्यालय से निश्शुल्क आवेदन पत्र तक नहीं मिला।

उनको काउंटर पर मौजूद कर्मचारी ने दलाल से दस रुपये का फार्म खरीदने का सुझाव दे दिया। बाद में उन्होंने दलाल से दस रुपये का फार्म खरीदा और दलाल ने उनसे लाइसेंस बनवाने के लिए 2400 रुपये मांगे। बाद में मौके पर पहुंचे एआरटीओ को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने कड़ी फटकार लगाई तथा दलालों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके अलावा एआरटीओ से स्पष्टीकरण भी मांगा है।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल को पिछले काफी समय से एआरटीओ कार्यालय में दलालों की सक्रियता की शिकायत मिल रही थी। इस पर सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे वे एआरटीओ कार्यालय के पीछे सरकारी वाहन खड़ा कर पैदल ही वहां सामान्य आवेदक की तरह पहुंची। वह आवेदन फार्म लेने काउंटर पर गई तो वहां कर्मचारी ने बताया कि फार्म नहीं हैं। बाहर एजेंट बैठा है उससे फार्म ले लें। इस पर वह दलाल के पास पहुंची तो मुफ्त मिलने वाला आवेदन फार्म दस रुपये का खरीदा। इसके अलावा दलाल ने उनको बताया कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए 2400 रुपये का खर्चा आएगा। उनको बार-बार चक्कर भी नहीं काटने पड़ेंगे।

इसके बाद वे फिर से काउंटर पर जाकर आवेदन भरने लगी तो तभी वहां देखा कि कई दलाल कर्मचारियों के पास बैठकर लाइसेंस बनवा रहे थे। इसी बीच कार्यालय में चक्कर लगाते हुए एआरटीओ शैलेष तिवारी वहां पहुंचे और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को पहचान लिया। वे अपनी सफाई देते इससे पहले ही जेएम ने उनको फटकार लगाई। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक टीम को बुलाकर एक एजेंट का खोखा भी सील करा दिया। इसके अलावा एजेंट के कंप्यूटर और प्रिंटर कब्जे में ले लिए।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने बताया कि एआरटीओ कार्यालय में एजेंट बेरोकटोक इधर से उधर घूमते पाए गए। जो भी वहां लाइसेंस बनवाने आ रहा था। एजेंट ही उन्हें डील कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले की रिपोर्ट बनाकर वह उच्चाधिकारियों को भेज रही हैं। एआरटीओ से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। एजेंटों को चिह्नित कर उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाएगी।

 

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