देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए वन विभाग ने राज्य में 10 नए ट्रांजिट सेंटर स्थापित करने की योजना तैयार की है। इन केंद्रों में तेंदुओं के साथ-साथ भालुओं को रखने के लिए भी विशेष बाड़े बनाए जाएंगे, ताकि रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को सुरक्षित रखा जा सके।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीते एक वर्ष में राज्य में भालू के हमले की 116 घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें आठ लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार बढ़ रही घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने ट्रांजिट सेंटरों की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया है।
वर्तमान में राज्य में केवल हरिद्वार के चिड़ियापुर में ही ट्रांजिट सेंटर संचालित है। नए प्रस्तावित ट्रांजिट सेंटरों में करीब 80 तेंदुओं को रखने की क्षमता विकसित की जाएगी। इसके अलावा भालुओं के लिए भी अलग से सुरक्षित बाड़ों की व्यवस्था की जाएगी।
अपर प्रमुख वन संरक्षक विवेक पांडे ने बताया कि योजना को स्वीकृति मिलने के बाद उसके डिजाइन को मंजूरी के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के पास भेजा गया है। वहीं अल्मोड़ा मिनी चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर को अलग-अलग संचालित करने की योजना भी बनाई जा रही है।
डीएफओ प्रदीप धौलखंडी ने बताया कि अल्मोड़ा स्थित रेस्क्यू सेंटर की क्षमता बढ़ाने पर भी कार्य किया जा रहा है, ताकि घायल और रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों की बेहतर देखभाल की जा सके।

