Saturday, March 7, 2026
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ऊंचाई की तरफ विकास दर; सकारात्मक और उत्साहवर्धक बदलाव- जयंतीलाल भंडारी

जिन क्षेत्रों में 6 फीसद से ज्यादा वृद्धि दर्ज हुई, उनमें विनिर्माण के अलावा बिजली, गैस, जल आपूर्ति, होटल, परिवहन एवं संचार तथा प्रसारण से जुड़ी सेवाएं शामिल हैं। स्पष्ट है कि उत्पादन और उपभोग दोनों ही मामलों में अर्थव्यवस्था आगे बढ़ी है।

केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने वित्तीय वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही जुलाई-सितम्बर में आर्थिक वृद्धि के जो आंकड़े पेश किए हैं, उनमें सकारात्मक और उत्साहवर्धक बदलाव दिखाई दे रहा है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में 6.3 फीसद की दर से बढ़ोतरी हुई है। पिछली तिमाही में यानी अप्रैल से जून के दरान जीडीपी वृद्धि दर 5.7 फीसद थी। लगातार कई तिमाहियां में जीडीपी की गिरावट के बाद सुधार यह बताता है कि अर्थव्यवस्था ने नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) जैसे अल्पकालिक आर्थिक झटकों को पीछे छोड़ दिया है। स्थिति यह है कि पिछले एक वर्ष से चले आ रहे अल्पकालीन आर्थिक प्रभाव कम हो गए हैं और आर्थिक सुधारों की प्रगति दिखाई दे रही है।

यदि हम नए आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पाते हैं कि इस दूसरी तिमाही में जीडीपी को जो गति मिली है, उसके लिए विनिर्माण क्षेत्र की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। दूसरी तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि 7 फीसद रही थी। जबकि पिछली तिमाही में यह महज 1.2 फीसद थी। लेकिन कृषि क्षेत्र में विकास दर घटी है और यह 1.7 फीसद रही जबकि पहली तिमाही में यह 2.3 फीसद थी। जिन क्षेत्रों में 6 फीसद से ज्यादा वृद्धि दर्ज हुई, उनमें विनिर्माण के अलावा बिजली, गैस, जल आपूर्ति, होटल, परिवहन एवं संचार तथा प्रसारण से जुड़ी सेवाएं शामिल हैं। स्पष्ट है कि उत्पादन और उपभोग दोनों ही मामलों में अर्थव्यवस्था आगे बढ़ी है।

नोटबंदी और जीएसटी के प्रभाव बीते हुए दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में वृद्धि की रफ्तार और भी तेज होने की उम्मीद है। स्पष्ट है कि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही से अर्थव्यवस्था में जो सुस्ती आई थी, उसका पहिया अब पलटता हुआ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2017 की शुरुआत में अर्थव्यवस्था के बदलाव की जो चुनौतियां झेलनी पड़ी थीं, वह दौर गुजरते हुए दिखाई दे रहा है और आगे लगातार बेहतरी के आसार दिख रहे हैं।निस्संदेह अब वर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही के आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि आर्थिक बदलाव के दौर में अर्थव्यवस्था निवेश और कारोबार सुधार की ओर बढ़ी है।

पिछले कुछ दिनों में देश की क्रेडिट रेटिंग बढ़ने और कारोबार आसान बनाने से संबंधित जो नई महत्त्वपूर्ण रिपोर्ट प्रकाशित हुई हैं, वे स्पष्ट संकेत दे रही हैं कि वर्ष 2017 में निवेश व कारोबार के मामले में भारत का परिदृश्य बदला है। पिछले दिनों 17 नवम्बर को अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की क्रेडिट रेटिंग को बीएए-3 से बढ़ाकर बीएए-2 कर दिया है। वर्ष 2004 के बाद यानी 13 साल बाद मूडीज ने भारत की रेटिंग में सुधार किया है।

रेटिंग में सुधार के लिए मूडीज ने ये कारण प्रस्तुत किए हैं-भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हो रही बढ़ोतरी, नोटबंदी और जीएसटी के लाभ, डूबते कर्ज से पैदा हुई बैंकिंग की समस्या को दूर करने के लिए सरकार द्वारा दिया गया पैकेज, देश भर में तेजी से बढ़े आधार कार्ड और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना के लाभ। मूडीज ने यह भी कहा है कि वर्ष 2017-18 में भारत की विकास दर 7.5 फीसद होगी। इसी तरह, बीती 31 अक्टूबर 2017 को विश्व बैंक द्वारा प्रकाशित ‘‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रैंकिंग में 190 देशों की सूची में भारत 100वें नंबर पर पहुंच गया है। इतना ही नहीं, विश्व बैंक ने भारत को इस साल सबसे ज्यादा सुधार करने वाले दुनिया के शीर्ष 10 देशों की सूची में शामिल किया है।

निश्चित रूप से देश की अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव के लिए विकास के साथ-साथ रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जाना होगा। विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर बढ़ानी होगी। कर अनुपालन और भुगतान को और सरल किया जाना होगा। जीएसटी का क्रियान्वयन सरल बनाया जाना होगा। सरकारी बैंक के पुनपरूजीकरण को कारगर तरीके से नियंत्रित करना होगा। कॉन्ट्रैक्ट पूरा करने और कंस्ट्रक्शन परमिट में अब भी काफी वक्त लगता है, उसे कम किया जाना होगा। बैंकिंग व आर्थिक मामलों में कोर्ट में सुनवाई की प्रक्रिया को तेज करनी होगी।

प्रॉपर्टी खरीदना और इसका रजिस्ट्रेशन कराना भी आसान बनाने की जरूरत है। उद्यमियों के लिए नौकरशाही कम करने, पैसे का लेन-देन आसान करने की जरूरत है। रोजगार, निर्यात और निजी निवेश बढ़ाने के कारगर प्रयास किए जाने होंगे। कारोबार के विभिन्न कदमों को तेज करने के लिए भ्रष्टाचार को नियंत्रित करना होगा। (साभार-राष्ट्रीय सहारा) 

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