Saturday, March 7, 2026
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प्रधानमंत्री मोदी का स्वच्छता अभियान तेजी से बढ़ रहा आगे

देहरादून। भारत मे आज भी 26 लाख से अधिक लोगों को खुले में शौच करने की आदत है। वही एक सर्वेक्षण के अनुसार, 60 प्रतिशत भारतीयों को अभी तक सुरक्षित और निजी शौचालय उपलब्ध नहीं हैं। इसी पृष्ठभूमि में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर, 2014 को राजघाट, नई दिल्ली से पानी, स्वच्छता, एवं स्वच्छता संबंधित चुनौतियों का सामना करने के लिए स्वच्छ भारत अभियान का शुभारंभ किया।

िविश्व बैंक भी 10,000 करोड़ रूपए के ऋण द्वारा इस अभियान को समर्थन दे रहा है। करीब 62,009 रुपये की अनुमानित लागत के तहत, 1.04 करोड़ परिवारों को शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसके अंतर्गत 2.5 लाख सामुदायिक शौचालयों, 2.5 लाख सार्वजनिक शौचालयों के अतिरिक्त सभी शहरों मे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधा प्रदान करना आदि सम्मिलित है। स्वच्छ भारत मिशन – का लक्ष्य महात्मा गांधी की 150वीं जयंती 2 अक्टूबर 2019 तक खुले में शौच को समाप्त करना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन स्वच्छता को पूरा होने में करीब दो साल बचे हैं। 27 जुलाई 2017 तक देश में करीब 71.12 प्रतिशत शौचालय बनाये जा चुके है, जबकी 2 अक्टूबर 2014 तक इसका प्रतिशत सिर्फ 38.7 प्रतिशत ही था। 2,48,000 गाॅवों और 5 राज्यों – सिक्किम , हिमाचल प्रदेश , केरल , उत्तराखंड और हरियाणा को ओपन डीफेकेशन – फ्री घोषित कर दिया गया है। लेकिन पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के एक रिपार्ट के अनुसार भारत के कुल 640 जिलो मेें से अभी भी लगभग 400 जिले का खुले में शौच मुक्त घोषित होना बचा है।

अभियान केवल स्वास्थ्य के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए भी बेहर जरूरी है। स्वच्छ भारत अभियान की सफलता परोक्ष रूप से भारत में निवेशक बढाने, जीडीपी दर बढाने, दुनिया भर मे पर्यटको का धयान खिंचने, स्वास्थ्य लागत कम करने, मृत्यु दर कम करने, घातक बीमारीयों की दर कम करने सहायक होगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच करने की प्रवृति भारत के विकास की अनेक चुनौतियों में एक प्रमुख कारण साबित हुई है। भारत में पूर्ण स्वच्छता के सामने बहुत सारी चुनौतियां हैं। सरकारी से लेकर, खुले में शौच और साफ-सफाई से संबंधित आदतों तक की। लोगों के मन, वचन और कर्म में गहरे पैठी हुई आदतों को बदलना इतना आसान नहीं होता। आदतों में बदलाव तो एक चुनौती है ही पर सरकारों की समझदारी भी सवालों के घेरे में है। सरकारें सबको शौचालय देना चाहती हैं लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि अधकचरी समझ से बन रहे शौचालय कहीं देश के भूजल को न प्रदूषित कर दें। इसके अलावा सब्सिडी दे-देकर कब तक शौचालय बनवाएंगे। फिर उनकी रख-रखाव के लिए क्या कोई नई स्कीम लाएंगे।

शौचालयों के निर्माण में निर्माण की गुणवत्ता, उन्नत रख-रखाव, सीवेज प्रबन्धन प्रणाली और पानी की उपलब्धता का ध्यान रखना अत्यंत ही आवश्यक है। सीवेज की सफाई का काम करने वाले मजदूरों को विभिन्न प्रकार के सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाने चाहियें।
हालांकि सरकार ने इस मिशन का जबरदस्त प्रचार किया है, इसके बावजूद अभी भी भारत में स्वच्छता के प्रति जागरूकता में कमी है जो चिंता का एक प्रमुख कारण है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर वातावरण को साफ रखने के लिए प्रयास करना शुरू कर दे तो जल्द ही निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम की प्राप्ति होगी।

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