टिहरी। प्रदेश में लगातार बढ़ रही गर्मी और बारिश की कमी का असर अब Tehri Dam पर साफ दिखाई देने लगा है। झील का जलस्तर घटकर न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे विद्युत उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। वर्तमान में टिहरी बांध से करीब 500 मेगावाट और कोटेश्वर बांध से लगभग 200 मेगावाट बिजली उत्पादन ही हो पा रहा है, जबकि सामान्य दिनों में टीएचडीसी द्वारा 1000 से 1200 मेगावाट तक विद्युत उत्पादन किया जाता है।
जानकारी के अनुसार, 42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैली टिहरी झील का जलस्तर इन दिनों घटकर आरएल 742.79 मीटर पहुंच गया है, जो सामान्य अधिकतम स्तर आरएल 830 मीटर से करीब 88 मीटर कम है। बारिश कम होने के कारण भागीरथी नदी से 126 क्यूमेक्स, भिलंगना नदी से 55 क्यूमेक्स और अन्य सहायक नदियों से केवल 54.32 क्यूमेक्स पानी ही झील में पहुंच रहा है।
जलस्तर कम होने के बावजूद झील से सिंचाई और पेयजल के लिए 140 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। ऐसे में टीएचडीसी के सामने बिजली उत्पादन के साथ-साथ विभिन्न राज्यों को पानी उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बना हुआ है। इन दिनों सुबह और शाम तीन-तीन घंटे के लिए चार के बजाय केवल तीन टरबाइन ही संचालित किए जा रहे हैं।
टीएचडीसी के मुख्य महाप्रबंधक आरआर सेमवाल ने बताया कि गर्मी के मौसम में बारिश कम होने से झील का जलस्तर घटना स्वाभाविक है, जिसका सीधा असर विद्युत उत्पादन पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मानसून शुरू होने के बाद जलस्तर में बढ़ोतरी होने लगेगी और बिजली उत्पादन भी सामान्य हो जाएगा।
टीएचडीसी के लिए 30 मार्च से 30 जून तक का समय सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इस दौरान उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे राज्यों को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराने के साथ देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना बड़ी जिम्मेदारी होती है।

