रुद्रपुर। कुमाऊं के पहले हाईटेक बस टर्मिनल निर्माण की राह अब आसान होती नजर आ रही है। बस टर्मिनल परियोजना में बाधा बनी करीब 48 दुकानों को हटाने की तैयारी प्रशासन ने तेज कर दी है। लंबे समय से नोटिस दिए जाने के बावजूद दुकानें खाली न होने पर अब प्रशासन ने 27 जून के बाद बुलडोजर कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
रुद्रपुर का पुराना बस अड्डा वर्षों से संचालित हो रहा है, जहां से उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों के लिए बसों का संचालन होता है। औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के बाद रुद्रपुर कुमाऊं की आर्थिक राजधानी के रूप में उभरा है। यहां लाखों श्रमिक कार्यरत हैं, जिससे यातायात और यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यहां हाईटेक बस टर्मिनल निर्माण की घोषणा की थी।
पुराने बस अड्डे की करीब साढ़े तीन एकड़ भूमि पर बनने वाले इस टर्मिनल के लिए परिवहन निगम और कार्यदायी संस्था सीआरएस इंफ्रा प्रोजेक्ट के बीच वर्ष 2016 में एग्रीमेंट हुआ था। हालांकि निर्माण प्रक्रिया वर्षों से धीमी गति से चल रही थी। मुख्यमंत्री के संज्ञान लेने के बाद पिछले दो महीनों में परियोजना को गति मिली है।
बस अड्डे के सामने रामपुर रोड की ओर बने पुराने भवनों को पहले ही ध्वस्त किया जा चुका है, लेकिन किच्छा बाईपास की ओर बनी करीब 48 दुकानें अब भी नहीं हटाई गई हैं। अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने मंगलवार को लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए कि बुधवार को दुकानदारों को हटने की मुनादी कराई जाए और इसकी वीडियोग्राफी भी कराई जाए।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 27 जून तक दुकानें नहीं हटने पर बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी और कार्रवाई में आने वाला खर्च संबंधित दुकानदारों से ही वसूला जाएगा। इस संबंध में अपर जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त से भी चर्चा की है।
80 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह हाईटेक बस टर्मिनल पीपीपी मोड पर संचालित किया जाएगा। निर्माण पूरा होने के बाद कार्यदायी संस्था सीआरएस इंफ्रा प्रोजेक्ट करीब 25 वर्षों तक इसका संचालन करेगी। टर्मिनल में सिनेमाघर, मॉल, वातानुकूलित विश्रामालय, कैंटीन और पेट्रोल पंप जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यहां से प्रतिदिन दिल्ली, लखनऊ, हरियाणा समेत विभिन्न राज्यों के लिए करीब 400 बसों का संचालन किया जाएगा।

