मसूद अजहर पर यूएन में जीत मोदी सरकार की ‘आक्रामक कूटनीति’ का नतीजा है

पिछले पांच सालों में देश में ऐसे-ऐसे काम हुए हैं या हो रहे हैं, जिनकी पहले कल्पना तो की जाती थी पर पूरी होने की उम्मीद नहीं। यही नए भारत की नई तस्वीर है। नरेंद्र मोदी सरकार इस तस्वीर की सर्जक है। उसने इस तस्वीर में ऐसे चटख रंग भरे हैं, जो सुखद लगते हैं।

राजनीति हो या कूटनीति, हर मोर्चे पर मोदी सरकार नए आयाम छूती जा रही है। यह मोदी सरकार की कूटनीतिक कामयाबी ही है कि अंततः चीन को भी मसूद अजहर मामले में झुकने को मजबूर होना पड़ा। संयुक्त राष्ट्र (यूएनएससी) ने मसूद अजहर को ‘वैश्विक आतंकी’ घोषित कर दिया, इसके साथ ही इतिहास में पहली बार भारत ने चीन को कूटनीति के मोर्चे पर मात दे दी है। मसूद अजहर उरी और पुलवामा हमले के लिए जिम्मेदार संगठन जैश-ए-मोहम्मद का चीफ है।

लंबे समय से भारत इस कोशिश में जुटा हुआ था, लेकिन चीन अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर अड़ंगे लगा रहा था। भारत से बेहतर संबंधों के चलते अमेरिका, यूके व फ्रांस की तरफ से मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए संयुक्त प्रस्ताव पेश कर दिया गया। मोदी सरकार की इस आक्रामक कूटनीति ने चीन को अपना रुख बदलने पर मजबूर कर दिया।

हालांकि सूत्रों का कहना है कि मसूद संबंधी प्रस्ताव को चीन भारत के लोकसभा चुनावों तक टालने की पूरी कोशिश कर रहा था, लेकिन वैश्विक दबाव के कारण उसकी चालाकी काम नहीं आई। आखिरकार 1 मई को उसे वैश्विक आतंकी घोषित कर ही दिया गया।

यह पहली बार है जब जम्मू-कश्मीर में किसी आतंकी हमले की वजह से एक आतंकी को वैश्विक आतंकी घोषित किया गया है। इससे पहले हाफिज सेड को मुंबई हमले के बाद वैश्विक आतंकी घोषित किया गया था। कहना न होगा, यह मोदी सरकार की नीतियों का ही फल है कि जो काम 10 साल में कांग्रेस नहीं कर पाई, वो काम मोदी सरकार ने सिर्फ 5 साल में कर दिया।

भारत के रुख के अनुसार हुई कार्रवाई: विदेश मंत्रालय

यूएनएससी में मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगने के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा कि आतंकी गुट जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई भारत के रुख के अनुसार हुई है। भारत द्वारा सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति के सदस्यों के साथ साझा की गई सूचनाओं के आधार पर ही यह कार्रवाई की गई है। मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के मामले में चीन हमेशा से अड़ंगा डालता रहा है, लेकिन इस बार उसे अपनी हार माननी ही पड़ी।

संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजदूत सैयद अकबरुद्दीन के मुताबिक, यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका हम कई वर्षों से इंतजार कर रहे थे। आज इस लक्ष्य को प्राप्त कर लिया गया है। इस प्रयास में सहयोग देने वाले सभी देशों, संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य अमेरिका, यूके, फ्रांस, परिषद में मौजूद और परिषद के सदस्य न होने पर भी हमारे साथ खड़े होने वाले देशों को मैं धन्यवाद देता हूं।

मसूद अजहर के वैश्विक आतंकवादी घोषित होने को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री ने खुशी और संतोष जताया है। जयपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने इसे बड़ी सफलता बताया और कहा, ‘यह तो सिर्फ शुरुआत है। आगे-आगे देखिए क्या होता है। यह सवा सौ करोड़ भारतीयों की सामूहिक शक्ति का परिणाम है। देर आए, दुरुस्त आए।’ साथ ही पीएम ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में साथ खड़ा रहने के लिए विश्व समुदाय को देश की जनता की ओर से आभार भी व्यक्त किया।

पीएम ने इस दौरान विपक्षी दल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि एक समय जब देश में रिमोट कंट्रोल की सरकार थी, तब पीएम की आवाज सरकार तक नहीं पहुंचती थी और आज देश ने देखा कि संयुक्त राष्ट्र में क्या हुआ। कैसे देश की सवा सौ करोड़ जनता संयुक्त राष्ट्र में दहाड़ रही है। वहीं मनमोहन सिंह ने कहा कि ‘मैं बेहद खुश हूं कि यह तय हो गया है।’

पुलवामा हमले के बाद शुरू हो गई थीं कोशिशें, दबाव में आया चीन

फरवरी में पुलवामा में आतंकी हमले के बाद भारत ने वैश्विक स्तर पर मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने को लेकर कोशिशें शुरू कर दी थीं। इस सिलसिले में कई देशों में अपने विशेष प्रतिनिधि भेजे, मसूद की आतंकी गतिविधियों के बारे में सबूत दिए। कई देशों के साथ इस संबंध में द्विपक्षीय वार्ता के जरिए दबाव बनाया।

लेकिन तीन मौकों पर प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति दर्ज कराकर खारिज करा चुके चीन ने भारत की इस कोशिश में एक बार फिर अड़ंगा लगाना शुरू कर दिया। उसने कहा कि मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने से पहले गंभीर चर्चा की जाए। जवाब में अमेरिका ने चीन से कहा कि अगर मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित नहीं किया जाता तो इसका असर क्षेत्रीय शांति पर पड़ेगा। हालांकि मार्च में यूएनएससी में मसूद के खिलाफ प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। तब अमेरिका और फ्रांस ने दूसरे विकल्प अपनाने पर जोर दिया। इंग्लैंड भी भारत के समर्थन में आ गया। भारत के दोस्त रूस और इंडोनेशिया ने भी चीन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।

अब चीन को यह डर सताने लगा कि अगर वह मसूद को बचाता है तो वैश्विक स्तर पर यह संदेश जाएगा कि वह आतंक को पनाह देने वाले देश पाकिस्तान को बचाने की कोशिश कर रहा है। इससे उसकी छवि पर भी असर पड़ सकता था। आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक जनमत में खुद के अलग-थलग पड़ जाने का डर भी था उसे। लिहाजा चीन ने अपने रुख पर विचार करना शुरू किया। पुलवामा हमले के जवाब में भारत की ओर से किए गए बालाकोट स्ट्राइक पर दुनिया के बड़े देशों के समर्थन ने भी चीन को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को मजबूर कर दिया।

यही नहीं, भारत में सोशल मीडिया में चीनी सामानों के बहिष्कार को लेकर चले अभियान ने भी चीन पर दबाव बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। चीनी सामानों के बहिष्कार को लेकर हैशटैग चीन और बॉयकाट चीनी प्रॉडक्टस सोशल मीडिया में खूब ट्रेंड हुए। आखिरकार चौतरफा दबाव के चलते चीन ने बुधवार को मसूद के प्रस्ताव पर से अपनी ‘तकनीकी रोक’ हटा ली।

अमेरिका ने कहा- साउथ एशिया में शांति की ओर एक महत्वपूर्ण कदम

यूएस सेक्रटरी ऑफ स्टेट ने यूएनएससी में पारित हुए इस प्रस्ताव पर कहा कि, ‘संयुक्त राष्ट्र में यूएस मिशन को मैं जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने में उनके काम के लिए उन्हें बधाई देता हूं। यह लंबे समय से प्रतीक्षित कार्रवाई अमेरिकी कूटनीति और आतंकवाद के खिलाफ और साउथ एशिया में शांति की तरफ एक महत्वपूर्ण कदम है।’

वहीं फ्रांस की तरफ से बयान आया, ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1267 सैंक्शन कमिटी द्वारा मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की आईएसआईएल और अल-कायदा सैंक्शन लिस्ट में शामिल करने के प्रस्ताव पर लिए गए फैसले का फ्रांस स्वागत करता है। फ्रांसीसी कूटनीति ने हमेशा मसूद अजहर को लेकर भारत के पक्ष का समर्थन किया है, विशेष रूप से पुलवामा हमले के बाद। फ्रांस ने 15 मार्च से अजहर के खिलाफ राष्ट्रीय सैंक्शन लागू कर रखा है।

पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के नापाक मंसूबों को तगड़ा झटका

मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी करार देना कश्मीर में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के नापाक मंसूबों के लिए तगड़ा झटका है। आईएसआई घाटी में जैश की आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देता आया है और एक रणनीति के तहत लश्कर-ए-तैयबा को पृष्ठभूमि में रखता है, क्योंकि लश्कर और उसके सरगना हाफिज मोहम्मद सईद को लेकर उसे अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ने का डर है।

अब जैश सरगना के भी वैश्विक आतंकी घोषित होने के बाद आईएसआई के लिए घाटी में जैश की गतिविधियों को आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाएगा। खासकर उसकी फंडिंग प्रभावित होगी, क्योंकि उसके अकाउंट या कोई भी फंड ट्रांसफर जो जैश से जुड़ा पाया गया, वह निगरानी में रहेगा। उसके खिलाफ टास्क फोर्स कार्रवाई कर सकेगी।

मसूद पर प्रतिबंध से पाकिस्तानी मीडिया सन्न

मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने के बाद पाकिस्तानी मीडिया सन्न है। उसकी हैरानी चीन के पलटी मारने को लेकर ज्यादा है। पाकिस्तानी मीडिया अपनी सरकार से सवाल पूछ रहा है कि क्या मसूद के मामले में उसने पाकिस्तान सरकार को भरोसे में लिया था या नहीं? हालांकि चौंकाने वाली बात यह है कि वहां ज्यादातर अखबारों या टीवी चैनलों ने इस मामले को ज्यादा तूल नहीं दिया, सिर्फ वही खबरें चलाईं जो न्यूज एजेंसी के हवाले से आई थीं। हैरत की बात यह भी है कि पाक मीडिया ने इस फैसले को ‘भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत’ बताया।

मसूद के वैश्विक आतंकी घोषित होने के बाद ये होगा असर

संयुक्त राष्ट्र द्वारा मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने के बाद उस पर दुनिया भर में कई तरह के प्रतिबंध लग जाएंगे। सबसे पहले तो दुनिया भर के देशों में मसूद अजहर की एंट्री पर बैन लग जाएगा। मसूद अब किसी भी देश में आर्थिक गतिविधियां नहीं कर सकेगा। पाकिस्तान को भी मसूद के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने पड़ेंगे। यही नहीं, पाक को उसके टेरर कैंप और उसके मदरसों को भी बंद करना पड़ेगा।

संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों को मसूद के बैंक अकाउंट्स और प्रॉपर्टी को फ्रीज करना पड़ेगा। मसूद से संबंधित व्यक्तियों या उसकी संस्थाओं को कोई मदद नहीं मिलेगी।

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