चंपावत। लोहाघाट के गुमदेश क्षेत्र स्थित नाकोट खोलिया गांव के पटौली तोक में वन विभाग द्वारा रेस्क्यू किए गए गुलदार की शुक्रवार सुबह मौत हो गई। गुलदार को गुरुवार को एक पुरानी गौशाला से सुरक्षित रेस्क्यू कर वन विभाग कार्यालय लोहाघाट लाया गया था। मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।
जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम पटौली तोक निवासी भवान राम की 17 वर्षीय बेटी रेखा गांव के पास बकरियों को चारा चुगा रही थी। इसी दौरान गुलदार ने उस पर और उसकी बकरियों पर हमला कर दिया। हमले में रेखा घायल हो गई, जबकि एक बकरी की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी के लिए ट्रैप कैमरे लगाए।
गुरुवार दोपहर ट्रैप कैमरे में गुलदार एक पुरानी गौशाला में जाता दिखाई दिया। इसके बाद एसडीओ नेहा सौन के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गुलदार को सुरक्षित रेस्क्यू कर लोहाघाट वन विभाग कार्यालय ले आई।
ग्रामीणों के अनुसार, गुलदार पिछले दो-तीन दिनों से गांव के आसपास घूम रहा था और उसके शरीर के पिछले हिस्से में चोट के निशान भी दिखाई दे रहे थे। शुक्रवार सुबह उसकी मौत हो गई।
एसडीओ नेहा सौन ने बताया कि गुलदार की उम्र लगभग आठ वर्ष थी। वह उम्रदराज होने के साथ कुछ बीमार भी प्रतीत हो रहा था। उन्होंने कहा कि मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।
इस बीच, घायल बालिका को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक प्रपत्र तैयार किए जा रहे हैं। रेस्क्यू अभियान में रेंजर रमेश जोशी, वन दरोगा अजय, वन बीट अधिकारी पीयूष सिंह, रोहित मेहता, कमलेश, शिवानी खर्कवाल सहित वन विभाग के अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
गौरतलब है कि स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेस्क्यू के दौरान विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सक के बजाय पशुपालन विभाग के चिकित्सक की देखरेख में गुलदार को ट्रेंकुलाइज किया गया था। हालांकि, इस संबंध में वन विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

