Wednesday, May 13, 2026
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धामी कैबिनेट के बड़े फैसले: पर्वतीय क्षेत्रों में स्वैच्छिक चकबंदी, होम स्टे और मेडिकल ढांचे में बदलाव

देहरादून। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल बैठक में 19 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा के बाद कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने पर्वतीय क्षेत्रों में स्वैच्छिक चकबंदी लागू करने सहित शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, ऊर्जा और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े कई निर्णय लिए।

कैबिनेट के फैसले के अनुसार पर्वतीय क्षेत्रों में स्वैच्छिक चकबंदी लागू की जाएगी। प्रत्येक जिले में 10 गांवों को लक्ष्य के रूप में चुना जाएगा और इसके लिए 75 प्रतिशत ग्रामीणों की सहमति आवश्यक होगी। पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होगी तथा आपत्तियों के निस्तारण की भी व्यवस्था रहेगी।

राजस्व परिषद समीक्षा अधिकारी सेवा नियमावली में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। अब अभ्यर्थियों के लिए केवल कंप्यूटर ज्ञान ही नहीं बल्कि 8000 शब्द प्रति घंटा टाइपिंग स्पीड, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस और विंडोज का ज्ञान भी जरूरी होगा।

कैबिनेट ने चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के पुनर्गठन को मंजूरी देते हुए पदों की संख्या 29 से बढ़ाकर 40 कर दी। वहीं राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में वर्ष 2009 से कार्यरत 277 कार्मिकों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने का निर्णय लिया गया। लैब टेक्नीशियन संवर्ग के पुनर्गठन के तहत 266 मेडिकल लैब टेक्निकल ऑफिसर पद भी सृजित किए जाएंगे।

महिला स्पोर्ट्स कॉलेज लोहाघाट में 16 पदों को मंजूरी दी गई। इसके अलावा फॉरेंसिक साइंस में 15 नए पद सृजित करने का फैसला भी लिया गया।

कैबिनेट ने लघु जल विद्युत परियोजना नीति में संशोधन को भी मंजूरी दी। अब डेवलपर की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी शून्य होगी और डीपीआर की जगह प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

पर्यटन क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लेते हुए यात्रा व्यवसाय पंजीकरण नियमावली में संशोधन किया गया है। अब होम स्टे में छह के बजाय आठ कमरे तक संचालित किए जा सकेंगे और उसका नवीनीकरण स्वतः हो जाएगा।

इसके साथ ही उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत शैक्षिक नियमावली को मंजूरी दी गई, जिसमें मान्यता, नवीनीकरण और मान्यता समाप्त करने की प्रक्रिया तय की गई है। पंचायत निर्माण कार्यों के लिए मिलने वाली राशि भी 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है।

कैबिनेट ने यूपीसीएल, यूजेवीएनएल और पिटकुल में निदेशक चयन नियमावली में संशोधन करते हुए बाहरी व्यक्तियों को भी निदेशक बनने का रास्ता साफ कर दिया है।

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