उत्तराखंड के चमोली जिले की नीती घाटी में स्थित शिव साधना पर्वत इन दिनों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के कोर क्षेत्र में स्थित इस पर्वत की चोटी पर प्राकृतिक रूप से बनी आकृति भगवान शिव के ध्यानमग्न स्वरूप जैसी दिखाई देती है। स्थानीय लोग इसे वर्षों से आस्था का केंद्र मानते हैं और श्रद्धालु इसे ‘शिव साधना पर्वत’ के नाम से जानते हैं।
गोपेश्वर से करीब 380 किलोमीटर दूर और ज्योतिर्मठ से लगभग 280 किलोमीटर आगे नीती घाटी में यह पर्वत स्थित है। पहले सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां आम लोगों की आवाजाही सीमित थी, लेकिन अब सड़क संपर्क बेहतर होने से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। यह मार्ग भारत-चीन सीमा की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों में शामिल है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, शिव साधना पर्वत के आसपास की पर्वत श्रृंखलाएं भी धार्मिक महत्व रखती हैं। पास ही पार्वती कुंड, तपोवन और मलारी क्षेत्र स्थित हैं, जहां भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।
पर्यटन गतिविधियों के जानकार अजय भट्ट का कहना है कि शिव साधना पर्वत तक श्रद्धालुओं की पहुंच बढ़ाने से नीती घाटी के सीमांत गांवों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उनका मानना है कि धार्मिक और ईको-टूरिज्म के विकास से सीमांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
जिलाधिकारी चमोली संदीप तिवारी ने भी इस क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं बताते हुए कहा है कि सीमावर्ती नीती घाटी में ईको और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि यहां आवश्यक पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएं तो स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित

